7 Laws Of Shiva Karma: आत्मज्ञान को पाने के दिव्य पथ, जिनके बारें में नहीं जानते होंगे आप

हिंदू धर्म के मानने वाले कर्म और इसके 12 कानूनों से वाकिफ होंगे। लेकिन कुछ बाते ऐसी होती हैं जो शिव भक्तों को छोड़कर बाकी लोगों को नहीं पता होती है। इनमें से ही है शिव कर्म के 7 कानून.. इन सात कानूनों के बारें में कम ही लोग जानते हैं।

इस कानूनों के आधार पर आप अपने डेली रूटीन से छेड़छाड़ किये बिना ही अपने उच्चतम अस्तित्व को प्राप्त कर सकते हैं। इन कानूनों को फॉलो करने से जीवन के साथ ही आपके मस्तिष्क और हृदय दोनों में ही शांति मिलती है, जिसकी तलाश में आप भटकते रहते हैं-

7 Laws Of Shiva Karma

देवो के देव शिव के नाम की उत्पत्ति ई + शाव = शिव (शव = मृत, और ई = ऊर्जा) की एक सुंदर अवधारणा है ये केवल दर्शाता है, सभी शिव से पैदा हुए हैं।

भगवान शिव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण भगवान हैं और ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव का दूसरा नाम) है। इनको त्रिमूर्ति कहा जाता है। निर्माण, संरक्षण और विनाश से जुड़े हैं।

'शिव कर्म नियमों' (7 Laws Of Shiva Karma) का पालन करके लोग आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं और जीवन का उच्चतम रूप प्राप्त कर सकते हैं।

7 Laws Of Shiva Karma

शिव कर्म के 7 नियम (7 Laws Of Shiva Karma) हैं जो आपको ज्ञान के उच्चतम रूप को पाने में मदद करते हैं-

1. सत्य
शिव कर्म का प्रथम नियम सत्य है। ये कानून भक्तों को सच, न्याय अपने आस-पास के लोगों के प्रति सच्चे होने के मार्ग पर चलने के लिए है। बेईमानी और झूठे कामों की जीत हो सकती है, लेकिन सच्चाई की हमेशा जीत होती है।

7 Laws Of Shiva Karma

2. ज्ञान ही ईश्वर है
एक शख्स हर चीज का ज्ञान नहीं रख सकता, लेकिन हर कोई किसी न किसी चीज की नॉलेज रख सकता है। व्यक्ति को चारों ओर अपने सारे कर्म करने चाहिए। हमें विश्वास करना चाहिए और जो हम जानते हैं उस पर भरोसा रखना चाहिए।

7 Laws Of Shiva Karma

3. सब कुछ एक भ्रम है
इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कैसा जीवन जी रहे हैं, आप किसी भी कंडीशन में हैं; अगर आप सिर्फ भौतिकवादी चीजों पर ही खुश रहते हैं तो ये खुशी एक भ्रम है। शिव कर्म का तीसरा नियम कहता है कि वे अपने सुख को सांसारिक वस्तुओं से ना जोड़ कर रखें।

7 Laws Of Shiva Karma

4. सुख से परे
आप जिस संसार में रह रहे हैं वो बहुत ही अधिक आत्ममुग्धता से भरा है। इस दुनिया में हर इंसान अपने को लेकर चिंतित रहता है, उसको इस बात की परवाह नहीं है कि उसके आसपास के लोग खुश भी है ना नहीं। लेकिन असली खुशी भौतिक सुखों से परे है। इसको तभी ही आप महसूस कर सकते हैं जब आपको सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आप दूसरों के लिए भी हमदर्द बनें रहे। ये खुशी अंदरूनी खुशी होती है, बाहरी नहीं।

7 Laws Of Shiva Karma

5. निराकार बनों
अगर आपने अपने आस-पास किसी ऐसे शख्स को देखा है जो हर वक्त खुश रहता है, तो ये गौर करेंगे कि उसे भौतिक सुख-सुविधाओं से लगाव नहीं रहता है। आप उन्हें किसी भी स्थिति में और किसी भी स्थान पर रख सकते हैं, वो बिना किसी शिकायत के वहां रह सकते हैं। साथ ही वो अपने मन में समान शांत और संतुष्ट भी रहते हैं। शिव कर्म का पांचवां और सबसे मौलिक नियम पानी की तरह निराकार होना है। खुद को लचीला और हर जगह सांमजस्य बनाने वाला है।
7 Laws Of Shiva Karma

6. अपनी सभी इंद्रियों का उपयोग करना
जब आपका मन शांत रहता है तो आप खुद के साथ बातचीत में लीन होने लग जाते हैं। आपकी सारी इंद्रियां एक साथ मिलकर तालमेल बैठाकर काम करती है। जब आप अपने आत्मज्ञान और अस्तित्व के बीच संतुलन बनाने लग जाते हैं तो जो अनुभूति होती है वो अतुलनीय होती है।

7 Laws Of Shiva Karma

7. आत्मज्ञान को जगाना
शिव कर्म के इस 7वें नियम से आप आत्मज्ञान पा सकते हैं। मन की इस अवस्था में, आप प्रकृति और वास्तविकता की उचित सांमजस्य के साथ-साथ आत्म-साक्षात्कार पाने लग जाते हैं। ये ज्ञानोदय अंतिम अवस्था है। इसे अपने संसारिक घरेलू जीवन का त्याग किए बिना ही पाया जा सकता है।

Image Courtesy- pinterest.com

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