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Ahohi Ashtami 2023: अहोई अष्टमी के दिन क्यों होती है तारों की पूजा और क्यों दिया जाता है अर्घ्य
Ahohi Ashtami 2023: हिन्दू संस्कृति में माताओं द्वारा रखे जाना वाला अहोई अष्टमी व्रत नवंबर माह में आने वाला है। करवा चौथ के तीन दिन बाद यह व्रत रखा जाता है, जिससे बच्चों की अच्छी सेहत और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस वर्ष अहोई अष्टमी 5 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन माताएं दिन भर उपवास रखती हैं और रात में तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देना ज़रूरी माना जाता है। जानते हैं अहोई अष्टमी के दिन क्यों होती है तारों की पूजा और उन्हें अर्घ्य देना ज़रूरी -

अहोई अष्टमी व्रत में तारों को क्यों दिया जाता है अर्घ्य?
अहोई अष्टमी एकलौता ऐसा पर्व है जिसमें तारों को अर्घ्य दिया जाता है। आसमान में तारों की संख्या अनगिनत है। मान्यता अनुसार इस दिन माताएं इन अनगिनत तारों की पूजा इसलिए करती हैं ताकि उनके कुल में भी इतनी ही संतान हों।
इसके साथ ही माताएं ये भी प्रार्थना करती हैं कि जिस प्रकार तारे सदा सदा के लिए आसमान में विद्यमान रहते हैं वैसे ही कुल की संतानें और परिवार के वंश भी सदा सदा के लिए रहें और तारों की ही तरह संतान भी कुल का नाम रोशन करें।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि आसमान के सब तारे अहोई माता की संतान के प्रतीक हैं इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत तारों को अर्घ्य दिए बिना पूरा नहीं माना जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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