Latest Updates
-
Mothers Day Wishes For Sasu Maa: सास-बहू के रिश्ते में घोलें प्यार की मिठास, भेजें ये शुभकामना संदेश -
Mango Chutney Recipe: कच्चे आम की चटनी बनाने की सबसे आसान विधि, जो पेट को देगी ठंडक -
क्या आप भी पीले दांतों से शर्मिंदा हैं? रसोई में रखी ये 5 चीजें साफ कर देंगी सालों से जमी गंदगी -
शनि, राहु और मंगल की चाल बदलेगी बंगाल की सत्ता? आचार्य विनोद कुमार ओझा ने की हैरान करने वाली भविष्यवाणी -
मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है Mother's Day? जानें इसके पीछे की भावुक करने वाली कहानी -
Gond Katira: इन 3 लोगों को गलती से भी नहीं लेना चाहिए गौंद कतीरा? वरना अस्पताल जाना तय -
दिल्ली के विवेक विहार में फटा एसी, गई कई लोगों की जान, जानें AC में फटने व आग लगने के कारण -
World Laughter Day 2026 Jokes: टेंशन को कहें टाटा! अपनों को भेजें ये फनी जोक्स, नहीं रुकेगी हंसी -
Aaj Ka Rashifal, 3 May 2026: आज वृश्चिक और कुंभ राशि वालों की लगेगी लॉटरी! जानें अपना भाग्यफल -
Bael Ka Juice: भयंकर गर्मी और लू से बचाएगा बेल का जूस, नोट करें बनाने की विधि और इसे पीने के लाभ
Pitru Paksha 2025 : अकाल मुत्यु, अज्ञात और अविवाहित पितरों का कैसे करें श्राद्ध? जानें नियम और पूरी विधि
Akal Mrityu Shradh 2025 : हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व है। यह हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर अमावस्या तिथि तक मनाया जाता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि इस समय पितृ लोक से पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों के तर्पण व पिंडदान से तृप्त होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं।
पितृपक्ष में कई लोग उन पूर्वजों का भी श्राद्ध करते हैं जिनकी अकाल मृत्यु हुई, जैसे दुर्घटना, आत्महत्या या असमय मृत्यु। शास्त्रों में अकाल मृत्यु वाले पितरों के श्राद्ध के लिए विशेष नियम और पद्धति बताई गई है। आइए जानें अकाल मृत्यु वाले पूर्वजों का श्राद्ध कब, कहाँ, कैसे होता है और गया जी की प्रेतशिला से इसका संबंध।

पितृपक्ष 2025 कब से कब तक?
द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होती है और यह आश्विन अमावस्या तक चलता है।
शुरुआत: 7 सितंबर 2025
समापन: 21 सितंबर 2025
इन 15 दिनों के दौरान मृत्यु तिथि और रिश्ते के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है।
अकाल मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध कहां और कैसे करें?
अकाल मृत्यु (जैसे दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या असमय मृत्यु) वाले पितरों का श्राद्ध सामान्य स्थानों पर नहीं किया जाता। इसके लिए विशेष स्थान और विधि बताई गई है।
प्रेतशिला पर्वत, गया (बिहार)
- अकाल मृत पितरों का पिंडदान और श्राद्ध गया जी स्थित प्रेतशिला पर्वत पर किया जाता है।
- पर्वत की चोटी पर प्रेतशिला वेदी है, जहां यह कर्मकांड संपन्न होता है।
- मान्यता है कि यहां श्राद्ध करने से अकाल मृत पितरों को प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
- इनका पिंडदान सामान्य अन्न से नहीं, बल्कि सत्तू से किया जाता है।
विशेष नियम
- सूर्यास्त के बाद यहां ठहरना या श्राद्ध करना वर्जित है।
- केवल दिन के समय ही पिंडदान और तर्पण किया जा सकता है।
पितृपक्ष में कब करें अकाल मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध?
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृपक्ष में आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अकाल मृत पितरों का श्राद्ध करना चाहिए।
इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से आत्मा को शांति मिलती है।
श्राद्ध कर्म कराने से पहले किसी योग्य और प्रकांड पंडित से परामर्श लेना जरूरी है, ताकि विधि-विधान सही तरीके से हो।
अन्य तिथियों का महत्व
पितृपक्ष की प्रत्येक तिथि का अलग महत्व है और अलग-अलग रिश्तेदारों का श्राद्ध इन दिनों किया जाता है:
प्रतिपदा तिथि: इसे पड़वा श्राद्ध कहते हैं। इस दिन जिनकी मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो, उनका श्राद्ध होता है। साथ ही नाना-नानी और उनके रिश्तेदारों के लिए तर्पण किया जाता है।
चतुर्थी तिथि: इस दिन अज्ञात और अकाल मृत पितरों का श्राद्ध किया जाता है।
पंचमी तिथि: इस दिन अविवाहित पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है।
श्राद्ध कर्म का महत्व
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का तरीका है। मान्यता है कि:
- श्राद्ध करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
- पितरों की आत्मा को तृप्ति और शांति मिलती है।
परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है, जिससे धन-धान्य और स्वास्थ्य की कमी नहीं होती।



Click it and Unblock the Notifications