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Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
Akshaya Tritiya 2026 Vrat Katha In Hindi: सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का त्योहार बेहद खास माना जाता है। अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, रविवार को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया पर शुभ कार्य और सोना-चांदी की खरीदारी किए जाने की परंपरा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा होती है। इस दिन कई लोग व्रत ही रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों और दान का अक्षय फल मिलता है, यानी इसका पुण्य कभी खत्म नहीं होता। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया पर पूजा के साथ कथा अवश्य पढ़नी चाहिए। तो आइए, पढ़ते हैं अक्षय तृतीया की व्रत कथा -

अक्षय तृतीया का महत्व क्या है? (Significance Of Akshaya Tritiya In Hindi)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया पर किए गए पूजा-पाठ और दान का कई गुना फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के घोड़े के सिर वाले अवतार हयग्रीव की उत्पत्ति हुई थी। वहीं, भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म भी इसी पावन तिथि पर हुआ था। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, जो इस तिथि को और भी पावन बनाता है।
अक्षय तृतीया की व्रत कथा (Akshaya Tritiya Vrat Katha In Hindi)
अक्षय तृतीया की कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मदास नाम का बहुत ही ईमानदार और धार्मिक वैश्य रहता था। वह अपने परिवार के साथ एक छोटे से गांव में रहता था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए उसे हमेशा परिवार के खर्च की चिंता रहती थी। फिर भी उसकी भगवान में गहरी आस्था थी।
एक दिन उसे अक्षय तृतीया व्रत के महत्व के बारे में पता चला। जब अक्षय तृतीया का दिन आया, तो उसने सुबह गंगा स्नान किया और विधि-विधान से भगवान की पूजा की। गरीब होने के बावजूद उसने उस दिन अपनी क्षमता से बढ़कर दान किया। उसने घड़ा, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गेहूं, गुड़, घी, दही और थोड़ा सा सोना भगवान को अर्पित किया और फिर ब्राह्मणों को दान दे दिया। धर्मदास को इतना दान करते देखकर उसके घर वाले परेशान हो गए। उसकी पत्नी ने भी उसे समझाया कि इतना सब दान कर देने से घर कैसे चलेगा, लेकिन धर्मदास ने श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करना जारी रखा। उसने अपने जीवन में हर साल अक्षय तृतीया के दिन इसी तरह पूजा और दान किया।
उसके इन अच्छे कर्मों का फल उसे अगले जन्म में मिला। कहा जाता है कि वह अगले जन्म में एक शक्तिशाली और प्रसिद्ध राजा बना। वह राजा बनने के बाद भी धर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलता रहा। माना जाता है कि यही राजा अगले जन्म में प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में पैदा हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब वह राजा यज्ञ करवाता था, तो देवता भी किसी न किसी रूप में वहां उपस्थित होते थे। त्रिदेवों की कृपा से उसे यह सम्मान और वैभव मिला। इसी तरह जो भी व्यक्ति अक्षय तृतीया के दिन श्रद्धा से दान-पुण्य करता है और इस कथा का पाठ करता है, उसे भगवान का आशीर्वाद जरूर मिलता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।



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