Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
Ayodhya Ram Mandir: 22 जनवरी प्राण प्रतिष्ठा के दिन करें इन चौपाइयों का पाठ, घर में होगा सुख समृद्धि का वास
Ayodhya Ram Mandir: 22 जनवरी को बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम यानी, अयोध्या राम मंदिर में राम लला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा, जहां प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि होंगे। इस कार्यक्रम में 7,000 से अधिक गणमान्य व्यक्ति, मशहूर हस्तियां, राजनेता, उद्योगपति और आध्यात्मिक नेता उपस्थित रहेंगे।
धार्मिक ग्रंथों में यह उल्लेख किया गया है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है। भगवान श्री राम के जीवन का चित्रण रामचरितमानस में मिलता है। इसके पाठ से जातक के साथ साथ उसके परिवार का भी कल्याण होता है। श्री राम का आशीर्वाद पाने के लिए रामचरितमानस का पाठ जरूर करना चाहिए और इसके लिए राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से बेहतर दिन और क्या हो सकता है।

भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के दिन इसका पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आएगी। यहां हम आपके लिए रामचरितमानस की चुनिंदा चौपाई और उनके अर्थ लेकर आये हैं जिनका पाठ 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन करने से जीवन में सकारात्मकता का वास होगा। साथ ही आप पर प्रभु श्री राम की कृपा बनी रहेगी।
दोहा
श्री गुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनु रघुबर बिमल जसु जो दैकु फल चारि।।
अर्थ: श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके मैं श्री रघुवीर की निर्मल महिमा का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का फल देने वाला है।
चौपाई 1
जब तेन रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बढ़े।।
भुवन चारिदास भूधर भारी। सुकृत मेघ बरशाही सुख बारी।।
अर्थ: जब से श्री रामचन्द्रजी विवाह करके घर आए हैं, तब से (अयोध्या में) प्रतिदिन नये-नये मंगल हो रहे हैं और खुशियों की बधाइयाँ बज रही हैं। पुण्य रूपी बादल चौदह लोक रूपी बड़े-बड़े भारी पर्वतों पर सुख रूपी जल की वर्षा कर रहे हैं।
चौपाई 2
रिधि सिधि संपति नादि सुहाई। उमागि अवध अंगबुद्धि कहु आई।।
मनिगन पुर नर नारी सुजति। सुचि अमोल सुन्दर सब भनति।।
अर्थ: ऋद्धि-सिद्धि और धन की मनोहर नदियाँ उमड़कर अयोध्या के समुद्र में मिल गईं। नगर के नर-नारी अच्छी जाति के रत्नों के समूह हैं, जो हर प्रकार से पवित्र, अमूल्य और सुन्दर हैं।
चौपाई 3
कहि न जाइ कछु नगर बिभूति। जनु एतानि बिरंचि करतूते।।
सब बिधि सब पुर लोग सुखारि। रामाचंद मुख चंदु निहारी।।
अर्थ: नगर के वैभव के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ऐसा लगता है मानों ब्रह्माजी की कारीगरी इतनी ही है। श्री रामचन्द्रजी का मुख देखकर सभी नगरवासी सब प्रकार से प्रसन्न व सुखी हैं।
चौपाई 4
मुदित मातु सब सखीन सहली। फलित बिलोकि मनोरथ बीले।।
राम रूपु गुन सीलु सुभाओ। प्रमुदित होइ देखि सुनि रऊ।।
अर्थ: अपनी इच्छा रूपी बेल को फलदार देखकर सभी माताएं और सखियां प्रसन्न होती हैं। श्री रामचन्द्रजी के रूप, गुण, शील और स्वभाव को देखकर और सुनकर राजा दशरथ बहुत प्रसन्न होते हैं।
दोहा
सब के उर अभिलाषु अस कहहिं मनइ महेसु। आप अचत् जुबराज पद रामहि देव नरसु।।
भावार्थ: सबके मन में ऐसी इच्छा होती है और सब महादेवजी से अनुनय करते हैं (प्रार्थना करते हैं) कि राजा अपने जीते जी ही श्री रामचन्द्रजी को युवराज का पद दे दें।
चौपाई 5
एक समय सब संगत समाज। राजसभं रघुराजु बिराज।।
सकल सुकृत मूरति नाराणाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उच्चाहू।।
भावार्थ: एक समय रघुकुल के राजा दशरथजी अपनी सारी सभा के साथ राजसभा में बैठे हुए थे। महाराज समस्त गुणों के अवतार हैं, श्री रामचन्द्रजी की सुन्दर स्तुति सुनकर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
चौपाई 6
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषेन। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
वैन तीनी काल जग माहीं। भूरिभाग दशरथ सम नाहिं।।
अर्थ: सभी राजा उनका आशीर्वाद चाहते हैं और लोक सेवक उनका भाव रखकर (अनुकूल रहकर) उनसे प्रेम करते हैं। तीनों लोकों (पृथ्वी, आकाश, पाताल) और तीनों कालों (भूत, भविष्य, वर्तमान) में दशरथजी के समान कोई भाग्यशाली नहीं है।
चौपाई 7
मंगलमूल रामु सुत जासु। जो कछु कहि ठोर सबु तासो।।
रयण सुभायण मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुतु सम कीन्हा।।
अर्थ: मंगल के मूल श्री रामचन्द्रजी जिनके पुत्र हैं, उनके लिए जो कुछ भी कहा जाए, वह बहुत कम है। राजा ने स्वाभाविक रूप से दर्पण हाथ में लिया और उसमें अपना चेहरा देखकर मुकुट सीधा किया।
चौपाई 8
श्रवण समीप भे सित केसा। मनहुं जरथापनु अस उपदेश।।
नृप जुबराजु राम कहुँ देहूं। जीवन जनम लहु किन लेहु।।
भावार्थ: उसने देखा कि कानों के पास के बाल सफेद हो गए हैं, मानो बुढ़ापा उपदेश कर रहा हो कि हे राजन! आप श्री रामचन्द्रजी को युवराज पद देकर अपने जीवन और जन्म का लाभ क्यों नहीं उठाते?
इन चौपाइयों का प्रतिदिन पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है, सुख, समृद्धि और शांति आती है। इनका पाठ करने मात्र से ही भक्त इन सकारात्मक गुणों को अपने जीवन में उतार सकते हैं। जय श्री राम।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications