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Ayodhya Ram Mandir Timeline: आसान शब्दों में समझें राम लला के मंदिर बनने की पूरी कहानी
Ayodhya Ram Mandir Timeline: सरयू नदी के किनारे बसे अयोध्या नगरी में ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था और इसे हिन्दू धर्म की सात पवित्र नगरों में से एक माना जाता है। अयोध्या नगरी में ऐतिहासिक राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
अयोध्या के जिस स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है वो सदियों से विवादित स्थल रहा है। वर्ष 2019 के 9 नवंबर को बहुप्रतीक्षित फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया और देश के सबसे लम्बे समय तक चलने वाले केस में यह ज़मीन मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंपने के लिया कहा।

इस विवाद की जड़ें बहुत पुरानी हैं हिन्दू पक्ष व मुस्लिम पक्ष के लोग और धार्मिक नेता इसपर अपना दावा करते आए हैं। जानते हैं इस मंदिर निर्माण के पहले का इतिहास और विवाद के मुख्य पड़ाव -
बाबर का आगमन और बाबरी मस्जिद का निर्माण
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार साल 1526 में बाबर का भारत में आगमन हुआ। इतिहासकारों के मुताबिक़ बाबर के सूबेदार मीर बाकी ने 1528 में अयोध्या में मस्जिद का निर्माण करवाया। इसे ही बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया।
हिन्दू पक्ष का दावा और सांप्रदायिक विवाद

वर्ष 1813 में पहली बार हिन्दू संगठनों ने इस जगह पर अपना दावा पेश किया। उनके मुताबिक़ यह राम जन्मभूमि थी और यहाँ मंदिर था। इस मंदिर को हटाकर ही मस्जिद का निर्माण किया गया है ऐसा उनका कहना था। हिन्दुओं के इस दावे के बाद इस विवादित स्थल पर नमाज़ के साथ साथ पूजा पाठ भी होने लगी।
वर्ष 1853 में इस विवादित मुद्दे को लेकर पहली बार हिन्दू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसा की पहली घटना हुई। इस वर्ष अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की।
पूजा स्थल का विभाजन
1855 के बाद हिन्दुओं को पूजा के लिए इस परिसर में प्रवेश करने की मनाही कर दी गई। ऐसे में हिन्दू समुदाय के लोगों ने मस्जिद के मुख्य परिसर से 150 फीट दूर स्थित राम चबूतरे पर पूजा करनी शुरू कर दी। इसके बाद ब्रिटिश शासन ने मस्जिद के सामने एक दीवार बनवा दी। अंदर का मुख्य परिसर मुस्लिम पक्ष के लिए तय किया गया और बाहरी पक्ष हिन्दुओं की प्रार्थना के लिए रखा गया।
पहली बार अदालत पहुंचा था मामला

यह विवादित मामला वर्ष 1885 में पहली बार निचली अदालत पहुंचा। फैजाबाद की जिला अदालत में महंत रघुबर दास ने राम चबूतरे पर छतरी व मन्दिर बनाने की अर्जी लगाई, जिसे अदालत द्वारा ठुकरा दिया गया।
वर्ष 1934 के सांप्रदायिक दंगे
अयोध्या में इस साल फिर दंगे भड़के। इस बार हिंसा में बाबरी मस्जिद का कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया। इस विवादित स्थल पर इन दंगों के बाद नमाज़ बंद कर दी गई।
1949 में मूर्ति स्थापना
वर्ष 1949 में मस्जिद के मुख्य गुम्बद में भगवान राम की मूर्तियाँ पाई गई। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि ये मूर्तियाँ हिन्दू पक्ष द्वारा रखी गई। फिर से साम्प्रदायिक माहौल संवेदनशील होने के बाद फैज़ाबाद कोर्ट ने विवादित ढाँचे के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। इसके बाद 1959 से 1961 तक, एक तरफ निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक़ का दावा किया वहीं दूसरी तरफ सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने।
1986 में फैज़ाबाद अदालत ने ताले को खोलने का आदेश दिया और अगले साल यह पूरा मामला इलाहाबाद कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1989 में विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।

1990-92 की रथ यात्रा
वर्ष 1990 में पहली बार अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन के लिए कारसेवा आयोजित की गई। कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था जिसके बाद पुलिस की गोलीबारी में पांच कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके बाद 1992 में एक बार फिर देश भर से कारसेवकों का आह्वान किया गया। कई हिन्दू संगठनों ने साथ आकर हज़ारों कारसेवकों को अयोध्या में एकत्रित किया और 6 दिसम्बर के दिन मस्जिद के ढाँचे को ढहाया गया। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे भड़कें जिनमें दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए।
इसके बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच शुरू की गई और यह मामला अदालत में भी शुरू हुआ।
2002 मंदिर निर्माण का आह्वान
विश्व हिन्दू परिषद् ने वर्ष 2001-2002 में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का आह्वान किया। सैकड़ों हिन्दू कार्यकर्ता मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में एकत्रित हुए। अयोध्या से लौटते वक्त हिन्दू सेवकों से भरी ट्रेन में गोधरा में आग लग गई। जिसके बाद पूरे गुजरात में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गये। लम्बे समय तक इस स्थान को लेकर यथास्थिति बनी रही और हर पक्ष अपना दावा ठोकता रहा।
वर्ष 2010 - इलाहबाद हाई कोर्ट ने विवादित ढांचे की ज़मीन को तीन पक्षों के बीच विभाजित किया। सुन्नी वक्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच मालिकाना हक़ बांटा गया। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 14 याचिकाएं दायर हुईं और सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायलय के इस फैसले को खारिज कर दिया। साल 2017 में कुछ शीर्ष नेताओं आडवानी, उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ़ बाबरी मस्जिद गिराने के आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
2019 का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक लगातार केस की सुनवाई हुई। 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय की बेंच ने 5-0 से एकमत होकर विवादित स्थल को मंदिर का स्थल मानते हुए, फैसला रामलला के पक्ष में सुनाया। इसके अंतर्गत विवादित भूमि को राम जन्मभूमि माना गया और मस्जिद के लिये अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का आदेश सरकार को दिया।
इसके बाद ही अब अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण शुरू किया गया है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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