Latest Updates
-
कौन हैं हरीश राणा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति? जानिए 13 साल से कोमा में क्यों थे -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर
Basant Panchami 2024 Kab Hai: फरवरी में किस दिन मनाया जाएगा बसंत पंचमी उत्सव, नोट करें शुभ मुहूर्त
Basant Panchami 2024 Kab Hai: बसंत पंचमी स्वर की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। इसी दिन माता सरस्वती का अवतरण हुआ था। मां सरस्वती को वीणावादिनी भी कहा जाता है।
सनातन धर्म (हिंदू धर्म) में माता सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, कला की देवी कहा जाता है। बसंत पंचमी का दिन देवी सरस्वती को ही समर्पित है। आइये जानते हैं इस साल बसंत पंचमी 2024 कब मनाया जाएगा। साथ ही जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

बसंत पंचमी 2024 कब है?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से होगा और इसका समापन 14 फरवरी को 12 बजकर 09 मिनट पर होगा। इस साल बसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी पूजन का शुभ मुहूर्त 14 फरवरी को सुबह 7 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। बसंत पंचमी के दिन शुभ मुहूर्त 5 घंटे 35 मिनट तक है।
बसंत पंचमी की पूजा विधि
इस दिन ब्रम्हा मूहर्त में स्नान करके पीले या श्वेत वस्त्र धारण करके विधि विधान पूजन किया जाता है। साथ ही माता सरस्वती को सफेद पुष्प अर्पित करते हैं और सफेद मिठाई भोग लगाते हैं। कहा जाता है बसंत पंचमी के दिन पंचांग खरीद कर किसी ब्राह्मण को दक्षिणा सहित दान देने से सुख शांति समृद्धि तथा शिक्षा का विस्तार होता है।
इस दिन ऋतुओं के राजा बसंत ऋतु का आगमन होता है। बसंत ऋतु आने से फल और फूलो में एक सौंधी महक बिखर जाती है। अनेक क्षेत्रों में हर्ष उल्लास का माहोल रहता है। होली के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में ढोल नगाड़े फाग गीत के साथ स्वागत करते हैं। बसंत पंचमी के मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में मेले जैसे पर्व भी मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार बसंत पंचमी के बाद मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।
मां सरस्वती की वंदना
1. या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥
2. या देवी सर्वभूतेषु मां शारदेरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
3. विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा |
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











