Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
Basant Panchami Katha: बसंत पंचमी पर इस शुभ मुहूर्त में जरूर करें पौराणिक कथा का पाठ
Basant Panchami Ki Katha: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मां सरस्वती के अवतरण के उत्सव को मनाया जाता है। इस दिन मां शारदे की विधि विधान से पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी उत्सव 14 फरवरी को मनाया जाएगा।
इस दिन सुबह 07:01 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन ज्ञान और स्वर की देवी मां सरस्वती की पूरी श्रद्धा से अराधना की जाती है। यह पूजा तभी संपन्न होती है जब मां सरव्स्ती से जुड़ी बसंत पंचमी कथा पढ़ी जाती है। यह कथा बेहद ख़ास होती है। पेश है बसंत पंचमी व्रत कथा -

बसंत पंचमी के व्रत कथा (Basant Panchami Saraswati Mata Ki Katha)
पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान विष्णु नारायण के अनुमति से भगवान ब्रह्मा ने मानव जीवन और मनुष्य योनि की संरचना की। मानव तथा जीव जंतु के रचना के पश्चात ब्रम्हा देव ने पृथ्वी का माहौल देखा तथा सोचने लगे कि इतने शांत क्यों है। इस माहौल को देखकर ब्रह्मा देव बहुत नाखुश हुए। भगवान ब्रह्मा जी ने श्री विष्णु के पास जाकर सारी बातों का ज़िक्र किया। इसके बाद श्री हरी विष्णु की आज्ञा के साथ भगवान ब्रह्मा ने अपने स्वर्ण रूपी कमंडल से जल निकाल कर पृथ्वी पर छिड़क दिया। ऐसा करने से एक नारायणी की उत्पत्ति हुई। जो छः भुजाएं वाली एक अद्भुत देवी थी। उनके एक हाथ में पुस्तक, दूसरे हाथ में श्वेत पुष्प, तीसरे और चौथे हाथ में स्वर्ण रूपी कमंडल तथा बाकी दो हाथों में मोती की माला के साथ वीणा थी।
इसको देखकर भगवान ब्रह्मा बहुत ही आकर्षित तथा प्रसन्न हुए। हाथों की वीणा को देखकर भगवान ब्रह्मा जी इस देवी को वीणा वादन करने के लिए कहा। वह देवी भगवान ब्रह्मदेव की बात को सुनकर अपने वीणा को नाद करने लगी। वीणा की आवाज़ बेहद मधुर संगीत के साथ मनमोहक भी थी। जिससे एक बेहतरीन माहौल बना। इसके पश्चात पूरे पृथ्वी के साथ-साथ संपूर्ण ब्रह्मांड में वीणा की धुन से बहुत ही मोहित तथा खिल उठा। वीणा की धुन सुनकर ऋषि मुनि भी खुश हो उठे और उत्सव जैसा माहौल बन गया। उसी दिन भगवान ब्रह्मा जी ने खुश होकर स्वर की देवी का नाम सरस्वती रख दिया। मां सरस्वती की वाणी भी बहुत सुंदर थी, उनकी मधुरता एवं सुंदरता को देखते हुए ऋषि चेतन ने उनके अवतरण दिवस के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाने की शुरुआत हुई।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications