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कुत्ता और मूषक को देवी-देवताओं ने अपनी सवारी चुना, मगर क्यों बिल्ली को किया नजरअंदाज, जानें यहां
हमने कई घरों में बिल्ली को पालते हुए देखा है। हमारे आस पास, गलियों और घरों की छतों पर बिल्लियां घूमती नज़र आ जाती हैं। लेकिन कई धार्मिक संस्कृतियों में बिल्लियों को अशुभ माना जाता है।
किसी बिल्ली के रोने की आवाज़ को अशुभता का प्रतीक भी माना जाता है। हिन्दू धर्म में हर देवी देवता की अपनी विशेष सवारी होती है। जैसे नंदी बैल, मूषकराज, और मोर- हंस इत्यादि। लेकिन बिल्ली एक ऐसा जानवर है जो किसी देवी देवता का वाहन नहीं है।

बिल्लियां मानी जाती हैं अशुभ
कुछ सांस्कृतिक संदर्भों में बिल्ली को भाग्योदय का चिन्ह माना जाता है। जहां चीनी संस्कृति में बिल्लियों को बेहद शुभ माना जाता है, वहीं हिन्दू संस्कृति में बिल्लियों को अपशगुन का प्रतीक माना जाता है। भारत में यदि बिल्ली आपका रास्ता काट दे तो अपशगुन हो जाता है। वहीं बिल्ली को जादू टोना, तंत्र मंत्र की विद्या से भी जोड़कर देखा जाता है। बिल्ली का रोना भविष्य की किसी अशुभ घटना की ओर इशारा करता है।
देवता नहीं दरिद्रता की है सवारी
बिल्ली किसी देवी देवता की सवारी नहीं होती। वह अलक्ष्मी की सवारी है। अलक्ष्मी दरिद्रता का अवतरण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के बाद अलक्ष्मी समुद्र से मदिरा लेकर निकली थीं, जिसके बाद उसने असुरों के साथ ही शरण ली थी। अलक्ष्मी को माता लक्ष्मी की बड़ी बहन माना जाता है। जहां लक्ष्मी धन की देवी हैं, वहीं अलक्ष्मी दरिद्रता की सूचक हैं। तभी से अलक्ष्मी को दरिद्रता का और उसकी सवारी बिल्ली को अपशगुन का प्रतीक माना जाने लगा। बिल्ली को किसी अन्य देवी देवताओं की सवारी ना बनने का श्राप भी मिला।
राहु की भी है सवारी
ज्योतिष शास्त्र में राहु को बेहद अशुभ ग्रह माना जाता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु का दोष उस जातक के भाग्य को अंधकार में डाल देता है। राहु का प्रभाव हमेशा समस्याओं को आमंत्रित करता है। राहु ग्रह की सवारी भी बिल्ली है। राहु नकारात्मकता का प्रतीक है इसलिए बिल्ली को भी अशुभ और नकारात्मक ऊर्जा का धारक माना जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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