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Brihaspativar Vrat Katha: बृहस्पति देव को करना है प्रसन्न तो पढ़ें ये कथा, कंगाल भी हो जाएंगे मालामाल
Brihaspativar Vrat Katha: हिन्दू धर्म में सप्ताह के हर दिन का एक विशेष देवता से संबंध माना गया है। गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित होता है। माना जाता है कि बृहस्पति देव की पूजा करने से और व्रत रखने से सारे दुख दूर हो जाते हैं और कंगाल भी मालामाल बन जाते हैं। इस दिन व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और धन-धान्य की कमी दूर होती है। साथ ही सुहागिन महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इस दिन श्रद्धालु पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और केले के पेड़ की पूजा करते हैं। जो लोग वीरवार का व्रत रखते हैं उनके लिए और जो नहीं रखते उनके लिए भी बृहस्पतिदेव की कथा सुनना फलदायी होता है। अगर आप व्रत रखते हैं तो इसमें कोई शंका नहीं कि इस कथा के बिना व्रत अधूरा है। आइए फिर जानते हैं बृहस्पतिदेव व्रत कथा और पूजा विधि।
बृहस्पतिवार का महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवता को समर्पित हैं। गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित होता है, जिन्हें देवताओं का गुरु माना जाता है। इन्हें ज्ञान, धर्म, धन, संतान और वैभव का कारक कहा गया है। इस दिन व्रत करने और कथा पढ़ने-सुनने से दरिद्रता, दुर्भाग्य और बाधाओं का नाश होता है।

बृहस्पतिवार व्रत कथा विस्तार से
प्राचीन समय में एक नगर में एक बहुत गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। उसके घर में सदैव दरिद्रता और अभाव का डेरा था। भोजन के लिए भी उन्हें कई बार दर-दर भटकना पड़ता था। एक दिन ब्राह्मण अपनी पत्नी से बोला -हमारे घर में कभी सुख-शांति और धन नहीं टिकता, आखिर इसका कारण क्या है? तब ब्राह्मणी ने कहा - इसका एक ही उपाय है, हमें गुरुवार का व्रत करना चाहिए। यदि हम श्रद्धा और विश्वास से व्रत करें तो बृहस्पति देव अवश्य प्रसन्न होंगे और हमारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।
पति-पत्नी ने उसी दिन से व्रत करना प्रारंभ किया। वे गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करते, केले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करते और कथा सुनते। कुछ ही दिनों में उनके घर में धीरे-धीरे समृद्धि आनी शुरू हो गई। अन्न-धन से घर भर गया। जो पड़ोसी पहले उनका मज़ाक उड़ाते थे, अब उनकी समृद्धि देखकर प्रभावित होने लगे। धीरे-धीरे उनकी गरीबी दूर हो गई और वे सुखी, सम्पन्न और आदर्श जीवन जीने लगे। इस प्रकार बृहस्पति देव की कृपा से एक गरीब ब्राह्मण भी मालामाल हो गया।
बृहस्पति वार व्रत विधि
प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
केले के पेड़ या भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र की पूजा करें।
हल्दी, चना दाल, पीले पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित करें।
व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
पीली वस्तुओं (चना दाल, हल्दी, पीले कपड़े) का दान करें।
दिनभर उपवास रखकर केवल पीले भोजन (जैसे चने की दाल, गुड़, हल्दी मिला प्रसाद) का सेवन करें।
व्रत के लाभ
घर से दरिद्रता और कलह दूर होती है।
परिवार में सुख-शांति और प्रेम बढ़ता है।
विवाह में आ रही बाधाएँ समाप्त होती हैं।
नौकरी, प्रमोशन और व्यवसाय में सफलता मिलती है।
संतान प्राप्ति और पारिवारिक उन्नति होती है।



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