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पुत्रदा एकादशी का व्रत पीरियड्स में रख सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम
Putrada Ekadashi Vrat During Periods: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से पुत्रदा एकादशी को संतान सुख, वंश वृद्धि और पारिवारिक समृद्धि के लिए किया जाता है। आज यानी 31 दिसंबर, दिन बुधवार को साल 2025 की आखिरी एकादशी है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और श्रद्धालु इस दिन उपवास, पूजा और जप-तप करते हैं। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि पुत्रदा एकादशी के दिन पीरियड्स हों, तो क्या व्रत रखना चाहिए या नहीं?
धार्मिक नियमों के साथ-साथ आज के समय में स्वास्थ्य और मानसिक शांति को भी ध्यान में रखना जरूरी है। आइए जानते हैं कि शास्त्र क्या कहते हैं, परंपरागत मान्यताएं क्या हैं और इस स्थिति में क्या करना उचित माना जाता है।

क्या पीरिय्ड्स में पुत्रदा एकादशी व्रत रख सकते हैं?
हर महिला का ये सवाल होता है कि क्या पीरियड्स में पुत्रदा एकादशी का व्रत रख सकते हैं या नहीं? वैसे तो कहीं भी ये नियम नहीं है कि आप पीरियड्स में व्रत नहीं रख सकते हैं। अगर शरीर स्वस्थ है तो व्रत तो रख सकते हैं लेकिन पूजा-पाठ आदि नहीं कर सकते और न ही भगवान को जल चढ़ा सकते हैं और न ही मंदिर जा सकते हैं। ऐसे में कई लोग पीरियड्स के दौरान भी व्रत रखते हैं तो कुछ लोग नहीं रखते हैं।
पीरियड्स में पुत्रदा एकादशी व्रत रखने के नियम
धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ, व्रत और मंदिर प्रवेश से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसे अशुद्धता नहीं बल्कि शारीरिक विश्राम की अवस्था माना गया है। ऐसे समय में शरीर कमजोर होता है, इसलिए उपवास करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। पुत्रदा एकादशी जैसे कठिन व्रत में निर्जल या फलाहार किया जाता है, जो पीरियड्स के दौरान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
क्या पीरियड्स में व्रत न रखने से पुण्य नहीं मिलता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत न रखने से कोई दोष नहीं लगता, यदि किसी कारण शारीरिक अवस्था हो। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि धर्म वही है जो शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी हो। यदि किसी महिला को पीरियड्स हैं, तो वह मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण कर सकती हैं। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप कर सकती हैं। व्रत का संकल्प मन में लेकर अगले महीने पूर्ण कर सकती हैं।

पीरियड्स में क्या क्या करें क्या न करें?
उपवास न करें (ये आपकी इच्छा और आपकी रीति पर निर्भर है)
पूजा सामग्री न छुएं।
मंदिर न जाएं।
साफ मन से भगवान का ध्यान करें।
विष्णु सहस्रनाम या कथा को मन ही मन सुनें या याद करें।
यह भी पूजा का ही एक स्वरूप माना जाता है।
स्वास्थ्य और श्रद्धा में संतुलन जरूरी।



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