Chaitra Navratri 2024 Day 3: जानें माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, कथा, मंत्र और आरती

CHaitra Navratri Day 3 Chandraghanta Mata Ki Puja Vidhi: नवरात्र के तीसरे दिन, यानी 11 अप्रैल, गुरूवार को मां दुर्गा के तीसरे रूप देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां के इस रूप में उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचन्द्र सुशोभित है, इसलिए मां के रूप को चंद्रघंटा कहा जाता है।

इसके साथ ही मां शेर पर सवार मुद्रा में रहती हैं, दस हाथों में कमल, कमंडल के अलावा तलवार, त्रिशूल, धनुष आदि अस्त्र भी रहते हैं। मां को पूजा में दूध से बनी मिठाई या केसर वाली खीर का भोग लगाना चाहिए। साथ ही मां चंद्रघंटा के मंत्र और आरती का गायन करना चाहिए। मां के इस रूप की पूजा करके आध्यात्मिक शक्ति और साहसी बनने का आशीर्वाद मिलता है।

Chaitra Navratri 2024 Day 3 Maa Chandraghanta Puja Vidhi Katha Mantra and Aarti In Hindi

माता चंद्रघंटा की कथा

प्रचलित कथा के अनुसार, माता दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का अवतार तब लिया था जब दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा था। उस समय महिषासुर का भयंकर युद्ध देवताओं से चल रहा था। महिषासुर देवराज इंद्र का सिंहासन प्राप्त करना चाहता था। वह स्वर्ग लोक पर राज करना चाहता था और अपनी इसी इच्छा को पूरा करने के लिए वह युद्ध कर रहा था। जब देवताओं को उसकी मंशा का पता चला तो वे परेशान हो गए और भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सामने जा पहुंचे। ब्रह्मा, विष्णु और महेश देवताओं की बात सुन बहुत क्रोधित हुए। क्रोध आने पर उन तीनों के मुख से ऊर्जा निकली। उस ऊर्जा से एक देवी अवतरित हुईं। उस देवी को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने अपना तेज और तलवार और सिंह प्रदान किया। इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा की।

मां चंद्रघंटा पूजा मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।
ऐं श्रीं शक्तयै नम:

मां चंद्रघंटा आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम,
पूर्ण कीजो मेरे काम।
चंद्र समान तू शीतल दाती,
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत बनाने वाली,
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो,
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली,
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये,
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं,
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता,
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा,
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी,
'भक्त' की रक्षा करो भवानी।।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Wednesday, April 10, 2024, 18:00 [IST]
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