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Chaitra Navratri 2025 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की होती है पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र और आरत
Chaitra Navratri 2025 Day 6 Maa Katyayani Puja Vidhi : चैत्र नवरात्र के छठवें दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा होती है। इस साल 3 अप्रैल 2025 के दिन मंगलवार यानी आज देवी की पूजा की जाएगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा के इस स्वरूप का अवतार कात्यायन ऋषि की पुत्री के रूप में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त देवी के इस रूप की पूजा भक्ति भाव के साथ करते हैं, उन्हें जगत जननी की कृपा से सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और उनका जीवन सुखमय रहता है।

मां कात्यायनी का स्वरूप
मां कात्यायनी का स्वरूप बहुत ही चमकीला है। इनकी चार भुजाएं हैं। उनका दायां ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में रहता है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल विराजमान है। मां कात्यायनी सिंह की सवारी करती हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां कात्यायनी मंत्र
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।जय जगमाता, जग की महारानी।
कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां।स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते।
मां कात्यायनी का भोग
मां कात्यायनी को पीला रंग अधिक प्रिय है। इसलिए उन्हें पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाना चाहिए। साथ ही माता को शहद से बने हलवे का भोग भी लगाना चाहिए। माता को सूजी के हलवे में शहद मिलाकर अर्पित कर सकते हैं।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
- इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके पीले रंग के वस्त्र धारण करें। आप चाहें तो लाल रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं।
- इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- सबसे पहले कलश का पूजन करें।
- मां कात्यायनी के मंत्र का जप करते हुए उन्हें वस्त्र अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें। माता को रोली का तिलक करें और अक्षत, धूप व पीले रंग के फूल अर्पित करें।
- मां को पान के पत्ते पर शहद लगाकर और बताशे में लौंग रखकर अर्पित करें।
अंत में कपूर जलाकर मां कात्यायनी की आरती करें।
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।



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