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Chaitra Navratri 2026 Havan: अष्टमी या नवमी पर हवन कैसे करें? जानें हवन विधि, मंत्र, मुहूर्त और सामग्री
Navratri Hawan Vidhi And Mantra: चैत्र नवरात्रि में हवन पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। कुछ श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक हवन करते हैं, जबकि कई लोग महाअष्टमी या महानवमी के दिन हवन करना अधिक शुभ मानते हैं। आप अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार हवन की तिथि चुन सकते हैं। लेकिन सामान्यतः महानवमी के दिन हवन करना ज्यादा प्रचलित है, क्योंकि इससे पूरे नवरात्रि पूजन की पूर्णाहुति मानी जाती है। नवमी तिथि पर किए जाने वाले इस हवन को दुर्गा होम या चंडी होम भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से हवन करने पर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। लेकिन इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप पूरे विधि-विधान और सही मंत्रों के उच्चारण के साथ ही हवन करें। तो आइए, जानते हैं नवरात्रि में हवन करने की संपूर्ण विधि और मंत्रों के बारे में -

चैत्र नवरात्रि 2026 हवन मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी: 26 मार्च, गुरुवार
शोभन योग: प्रात:काल से लेकर देर रात 12:32 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:18 बजे से लेकर 07:50 बजे तक
दुर्गा अष्टमी हवन मुहूर्त: सुबह 10:55 से लेकर दोपहर 01:59 बजे तक
महानवमी: 27 मार्च, शुक्रवार
रवि योग: पूरे दिन
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:17 बजे से लेकर दोपहर 03:24 बजे
महानवमी हवन मुहूर्त: सुबह 06:17 बजे से लेकर 10:54 बजे तक
नवमी तिथि: सुबह 10:06 बजे तक
दशमी: 28 मार्च, शनिवार
रवि योग: सुबह 06:16 बजे से लेकर दोपहर 02:50 बजे तक
दशमी हवन मुहूर्त: सुबह 07:49 बजे से लेकर 09:21 बजे तक
नवरात्रि हवन विधि
नवरात्रि में हवन करते समय सही विधि का पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है। सबसे पहले हवन कुंड में आम की लकड़ियां रखें और उसके ऊपर कपूर रखकर अग्नि प्रज्ज्वलित करें। जब अग्नि स्थिर हो जाए, तब श्रद्धा के साथ मंत्रों का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री और घी की आहुति देना शुरू करें। हवन के अंत में एक सूखा नारियल लें, उसमें घी और बची हुई हवन सामग्री भरें और उस पर लाल कलावा बांध दें। अब इस नारियल को हवन कुंड के बीच में रखकर पूर्णाहुति दें। पूर्णाहुति के समय यह मंत्र बोलें -
"ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा॥"
इस मंत्र के साथ आहुति देने के बाद हवन पूर्ण माना जाता है। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और उनसे सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना करें।
नवरात्रि हवन सामग्री लिस्ट
नवरात्रि हवन करने के लिए पहले से सभी जरूरी सामग्री एकत्र कर लेना चाहिए, ताकि पूजा विधि में कोई बाधा न आए। हवन में उपयोग होने वाली मुख्य सामग्री इस प्रकार है -
हवन कुंड
शुद्ध घी या तिल का तेल
घी अर्पित करने के लिए चम्मच (स्रुवा)
जल अर्पित करने के लिए पात्र और चम्मच
कपूर और माचिस
सूखे नारियल (गोला)
गाय के गोबर के उपले
हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों का मिश्रण)
तिल (काला या सफेद)
काजू, बादाम और अन्य सूखे मेवे
नवरात्रि हवन मंत्र
नवरात्रि हवन के दौरान मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए इन प्रमुख मंत्रों का जाप करते हुए आहुति दी जाती है -
प्रारंभिक आहुति मंत्र
ॐ प्रजापतये स्वाहा।
ॐ इन्द्राय स्वाहा।
ॐ अग्नये स्वाहा।
ॐ सोमाय स्वाहा।
ॐ भूः स्वाहा।
नवग्रह मंत्र
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
ऊँ चंद्राय नमः स्वाहा
ऊँ भौमाय नमः स्वाहा
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
ऊँ शनये नमः स्वाहा
ऊँ राहवे नमः स्वाहा
ऊँ केतवे नमः स्वाहा
गायत्री मंत्र (21 बार)
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा॥
देवता आहुति मंत्र
ॐ गणेशाय नमः स्वाहा।
ॐ गौर्यै नमः स्वाहा।
ॐ नवग्रहाय नमः स्वाहा।
ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा।
ॐ महाकालिकाय नमः स्वाहा।
ॐ हनुमते नमः स्वाहा।
ॐ भैरवाय नमः स्वाहा।
ॐ कुलदेवताय नमः स्वाहा।
ॐ स्थानदेवताय नमः स्वाहा।
ॐ ब्रह्माय नमः स्वाहा।
ॐ विष्णवे नमः स्वाहा।
ॐ शिवाय नमः स्वाहा।
नवदुर्गा मंत्र
ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा
ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा
ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा
ॐ चंद्रघंटा देवी नमः स्वाहा
ॐ कूष्मांडा देवी नमः स्वाहा
ॐ स्कंदमाता देवी नमः स्वाहा
ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा
ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा
ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा
ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा
विशेष मंत्र
ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुते स्वाहा॥
ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी
भानुः शशिः भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः
सर्वे ग्रहा शांति कराः भवन्तु स्वाहा॥
ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः
गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः स्वाहा॥
महामृत्युंजय मंत्र (11 बार)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वाहा॥
नारायणी मंत्र
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते स्वाहा॥
बीज मंत्र (108 बार)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै स्वाहा॥
दुर्गा स्तुति मंत्र (हवन आहुति हेतु)
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा॥
पूर्णाहुति मंत्र
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ स्वाहा॥



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