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Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Chaitra Purnima 2026: हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। यह तिथि नए संवत्सर की पहली पूर्णिमा होती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी शुभ दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था, जिसके कारण पूरे देश में इस दिन हनुमान जयंती बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ स्नान और दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं, भगवान की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। आइए, जानते हैं इस बार चैत्र पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में -

चैत्र पूर्णिमा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल, बुधवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से होगी। यह तिथि 2 अप्रैल, गुरुवार को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। यानी यह तिथि दोनों दिनों में रहेगी
कब रखें व्रत और कब करें स्नान-दान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत और स्नान-दान के लिए तिथि का चयन अलग-अलग नियमों के आधार पर किया जाता है। पूर्णिमा व्रत उसी दिन रखा जाता है, जब शाम के समय चंद्रमा उदित होने पर पूर्णिमा तिथि मौजूद हो। साल 2026 में 1 अप्रैल की शाम करीब 6 बजकर 11 मिनट पर चंद्रमा उदित होगा और उस समय पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए व्रत 1 अप्रैल, बुधवार को रखना शुभ माना गया है। वहीं, स्नान-दान जैसे कार्य अगले दिन भी किए जा सकते हैं, जिसका धार्मिक महत्व होता है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव
चैत्र पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर बजरंगबली का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन उनकी पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई भक्ति से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव पूजा का शुभ मुहूर्त
2 अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती के दिन पूजा के लिए सुबह का शुभ समय 6 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, शाम के समय भी पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन शाम 6 बजकर 39 मिनट से रात 8 बजकर 6 मिनट के बीच हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना गया है। इन मुहूर्तों में श्रद्धा के साथ पूजा करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
चैत्र पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस तिथि को पूजा-पाठ, व्रत और दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ की गई उपासना से जीवन के कष्ट कम होते हैं और सुख-शांति बनी रहती है। इसी दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। भक्त इस दिन उनकी पूजा करके शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान-पुण्य और स्नान का फल कई गुना अधिक मिलता है। इसलिए लोग इस दिन भक्ति और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान करना शुभ माना जाता है, नहीं तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें।
पूजा स्थान को साफ करके दीपक जलाएं और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके साथ भगवान विष्णु का भी स्मरण करें।
हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और तुलसी अर्पित करें।
भोग के रूप में बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या फल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
इसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या राम नाम का जाप करें और अंत में आरती करें।
पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान करना और प्रसाद बांटना भी शुभ माना जाता है।



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