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Chanakya Niti: बहुत जल्द नष्ट हो जाती हैं ये चीजें, दूरी बनाकर जीवन रखें सुखी
आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोकों के माध्यम से जीवन संबंधित इतनी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं जो आज के समय और समाज में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने राज्य और घर की अर्थव्यवस्था से लेकर पारिवारिक और सामाजिक संबंधों, जीवन के दर्शन, सफ़ल होने के तरीकों के बारे में विस्तार से अपनी रचनाओं जैसे अर्थशास्त्र, चाणक्य नीति आदि में लिखा।
उन्होंने एक श्लोक के माध्यम से उन चीज़ों के बारे में बताया जो जल्द ही नष्ट हो जाती है। इन चीज़ों से जीवन में दूर रहकर जीवन सुखी रह सकता है। जानते हैं आचार्य चाणक्य द्वारा चाणक्य नीति में लिखा गया वह श्लोक जो शीघ्र नष्ट होने वाली चीज़ों की व्याख्या करते हैं
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नदीतीरे च ये वृक्षाः परगेहेषु कामिनी ।
मन्त्रहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम् ॥
नदी के किनारे लगे वृक्ष का जीवन बेहद कम समय का होता है। वह जल्दी नष्ट हो जाता है। नदी के तेज़ बहाव, बाढ़ या किसी भी प्राकृतिक आपदा के आने से वह वृक्ष उखड़ जाता है। यह बात हमारे जीवन के लिए यह संकेत देता है कि नदी जैसे स्वच्छंद लेकिन प्रलयकारी प्रकृति के लोगों या परिस्थिति में रहना आपके जीवन को नष्ट कर सकता है।
श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दूसरों के घर में रहने वाली स्त्री भी स्वयं अपना जीवन नष्ट कर देती है। अर्थात जो महिलायें दूसरों के घर परिवार के मामलों में ही खुद को व्यस्त रखती हैं, वह अपना घर और अपना जीवन नहीं बचा पाती हैं।
चाणक्य श्लोक की दूसरी पंक्ति में यह बोलते हैं कि मंत्रियों के बिना एक राजा अपना राज्य का संचालन नहीं कर पाता है। सलाहकारों एवं मंत्रियों के अभाव में अकेला राजा अपने राज्य की रक्षा नहीं कर पाता और ऐसे राज्य का विनाश ही होता है। इससे प्रेरित होकर हम यह मान सकते हैं कि सुखी और सफ़ल जीवन के लिए सलाहकारों और शुभचिंतकों का होना ज़रूरी होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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