Latest Updates
-
क्या लग सकता है 'एनर्जी लॉकडाउन'? LPG से पेट्रोल तक बाबा वेंगा की 3 भविष्यवाणियां जो सच होती दिख रहीं -
Ram Navami Wishes in Marathi: राम जन्मोत्सवाच्या हार्दिक शुभेच्छा! मराठी में दें रामनवमी की शुभकामनाएं -
Ram Navami 2026 Wishes: जिनके मन में श्री राम हैं...राम नवमी पर अपने प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Ram Navami 2026 Sanskrit Wishes: 'अस्तु शुभं रामनवमी', अपनों को भेजें ये खास संस्कृत श्लोक और संदेश -
Navratri Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती -
अष्टमी-नवमी पर कन्याओं के लिए 15 मिनट में तैयार करें भोग की थाली, नोट करें परफेक्ट हलवा-चना रेसिपी -
Durga Ashtami 2026 Wishes: मां दुर्गा का आशीर्वाद मिले...दुर्गा अष्टमी पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Durga Ashtami Sanskrit Wishes: दुर्गा अष्टमी के पावन मौके पर अपने प्रियजनों को भेजें ये संस्कृत संदेश -
Aaj Ka Rashifal 26 March 2026: आज दुर्गा अष्टमी और शुक्र गोचर का महासंयोग, जानें मेष से मीन तक का राशिफल -
Bank Holidays March 2026: अगले 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, राम नवमी पर कहां-कहां रहेगी छुट्टी? देखें पूरी लिस्ट
चंद्र ग्रहण 2025: क्या आप जानते हैं कि ग्रहण के दौरान खाने की चीजों में तुलसी और कुशा क्यों डाली जाती है?
Chandra Grahan 2025: हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण को केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय वातावरण में सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं और माना जाता है कि नकारात्मक ऊर्जा व जीवाणुओं का प्रभाव तेजी से बढ़ जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में ग्रहण काल के दौरान खाना बनाने, खाने और छूने तक की मनाही बताई गई है। कहा जाता है कि सूतक काल लगने के बाद से ही कुछ भी खाना-पीना मना होता है। वहीं हम बचपन से ये भी देखते आए हैं कि ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों यहां तक की दूध और पानी में भी तुलसी का पत्ता डाल दिया जाता है।
तुलसी के अलावा कुशा को भी ग्रहण में खाने की चीजों में डालने में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ग्रहण के समय बचे हुए खाने में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा क्यों है? हो सकता है कि बहुत से लोगों को इस बारे में न पता हो, तो चलिए आज हम जान लेते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य।
तुलसी के पौधे का महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार तुलसी माता को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। हर हिंदू घर में इसकी पूजा होती है और इसे अत्यंत पवित्र, शुभ और रक्षा करने वाली मानी जाती है। हर हिंदू घर में तुलसी का पौधा होता है जिसकी रोजाना पूजा की जाती है। ऐसे में ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्तों को खाने-पीने की चीजों में डालना शुभ माना जाता है।

ग्रहण में खाने में क्यों डाली जाती है तुलसी
तुलसी को बहुत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालने से भोजन शुद्ध और सुरक्षित रहता है। मान्यता है कि तुलसी माता की उपस्थिति से ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का असर भोजन पर नहीं होता।
तुलसी डालने का वैज्ञानिक कारण
चंद्र ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म जीवाणुओं (micro-organisms) की वृद्धि मानी जाती है। तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो भोजन को खराब होने से बचाते हैं। तुलसी पत्ते भोजन को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी डालना लाभकारी है।
कुशा क्यों डाली जाती है?
हिंदू धर्म में कुशा को भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। कुशा को भी शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि यह माता सीता के केशों से उत्पन्न हुई थी, वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार यह भगवान विष्णु के वामन अवतार के समय उनके गिरे हुए बालों से उत्पन्न हुई। इसलिए ग्रहण काल में कुशा का प्रयोग फलदायी माना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications











