Latest Updates
-
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग
Chhath Puja Ke Niyam: पहली बार कर रही हैं छठ व्रत? इन बातों का रखें ध्यान, ताकि खंडित न हो व्रत
Chhath Puja Ke Niyam: सनातन धर्म में छठ पूजा का महत्त्वपूर्ण व्रत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत कठिन माने जाने वाले व्रतों में से एक है। यदि आप पहली बार छठ का व्रत कर रही हैं, तो कुछ नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानें छठ पूजा के विशेष नियम।
छठ पूजा उत्तर भारत, विशेषकर बिहार में, एक प्रमुख पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह व्रत 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है, जिसमें सुहागिन महिलाएं भगवान सूर्य और छठ मैया की आराधना करती हैं।

इस व्रत में भगवान सूर्य को संध्या और उषा (सुबह) काल में अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जिसके बाद व्रत पूरा होता है। मान्यता है कि यह व्रत संतान की खुशहाली और परिवार के सुख के लिए रखा जाता है। सच्चे भाव से की गई पूजा छठी मैया को प्रसन्न करती है, जो व्रती की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और आशीर्वाद देती हैं।
छठ पूजा की तिथि: (Chhath Puja 2024 Dates)
पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 7 नवंबर को दोपहर 12:40 बजे से शुरू होगी और 8 नवंबर को 12:34 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, छठ महापर्व 7 नवंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। व्रत का क्रम इस प्रकार है:
नहाय-खाय: 5 नवंबर 2024
खरना: 6 नवंबर 2024
संध्या अर्घ्य: 7 नवंबर 2024
उषा अर्घ्य: 8 नवंबर 2024
छठ महापर्व के नियम: (Chhath Puja Ke Niyam)
नहाय-खाय का दिन: छठ पूजा नहाय-खाय से शुरू होती है। इस दिन घर की सफाई की जाती है और सात्विक भोजन पकाया जाता है। नहाय-खाय से ही लहसुन-प्याज का उपयोग बंद कर दिया जाता है, जिससे घर का वातावरण पवित्र रहता है।
प्रसाद की तैयारी: छठ पूजा के प्रसाद को पारंपरिक रूप से मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। यदि यह संभव न हो, तो गैस चूल्हा साफ करके भी इसका उपयोग किया जा सकता है। प्रसाद बनाने का कार्य वही लोग करते हैं जिन्होंने व्रत का संकल्प लिया हो। प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: नहाय-खाय के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर सोती हैं। व्रत का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके किया जाता है, और पूजा में बांस से बनी सुपली और टोकरी का उपयोग किया जाता है।
तन-मन की स्वच्छ्ता: छठ व्रत में बहरी साफ़ सफाई के सास्ठ साथ व्रती को अपना मन भी स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार नहीं लाने चाहिए। किसी के लिए दुर्भावना मन में ना लाएं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
