Devshayani Ekadashi Vrat: देवशयनी एकादशी पर क्या खाएं, क्या न खाएं? पालन न किया तो व्रत हो सकता है अधूरा

Devshayani Ekadashi Vrat Rules: देवशयनी एकादशी व्रत जिसे आषाढ़ी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के चार महीने के शयन काल की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। लेकिन इस व्रत का संपूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पालन सही नियमों और आहार संयम के साथ किया जाए।

शास्त्रों में खानपान को लेकर कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। अगर आप भी इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो जानिए इस दिन क्या खाएं और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

Devshayani Ekadashi Vrat Rules

देवशयनी एकादशी पर क्या खाएं?

साबूदाना और फलाहार
साबूदाना खिचड़ी, फल, नारियल पानी, दूध, पनीर, मूंगफली इत्यादि व्रत के लिए उपयुक्त हैं।
सिंघाड़े या कुट्टू का आटा
इससे बनी पूरी या पराठा खाया जा सकता है।
सादा नमक की जगह सेंधा नमक
व्रत में सेंधा नमक ही उपयोग करें।
गाय का दूध और दही
भगवान विष्णु को अर्पित कर इसे सेवन करना शुभ माना जाता है।
साबूदाना टिक्की, आलू की सब्जी
बिना प्याज-लहसुन की बनी हल्की चीज़ें व्रत में खा सकते हैं।

Devshayani Ekadashi Vrat Rules

देवशयनी एकादशी पर क्या न खाएं?

अनाज और दालें
चावल, गेहूं, चना, राजमा जैसी चीजें पूरी तरह वर्जित हैं।
प्याज और लहसुन
तामसिक भोजन से व्रत का पुण्य कम हो जाता है।
मांस, मछली और अंडा
नॉनवेज बिल्कुल वर्जित है।
मसालेदार और तला-भुना भोजन
व्रत में सात्विकता का ध्यान रखना जरूरी होता है।
साधारण नमक
केवल सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए।

यदि आप उपवास रख रहे हैं और स्वास्थ्य कारणों से कुछ खाना जरूरी हो, तो डॉक्टर की सलाह से फलाहार करें। व्रत के दौरान भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और श्रीहरि का ध्यान करना विशेष फलदायी होता है।ॉ

कब करें व्रत का पारण

देवशयनी एकादशी पारण विधि व्रत का समापन करने का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। व्रत का फल तभी पूर्ण रूप से मिलता है जब उसका पारण सही समय और विधि से किया जाए। पारण का अर्थ है व्रत खोलना, जो एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है। पारण का समय द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है। ध्यान रखें कि एकादशी व्रत द्वादशी तिथि के भीतर ही खोला जाना चाहिए, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है। ज्योतिष पंचांग में बताए गए पारण मुहूर्त के अनुसार ही पारण करें।

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पारण की विधि

सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्री हरि विष्णु का ध्यान करें।

उन्हें फल, तुलसी पत्र, पंचामृत, और पीले फूल अर्पित करें।

द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोजन या दान करें।

सात्विक आहार से व्रत खोलें।

पारण में फलाहार, खिचड़ी, साबूदाना या हल्का सात्विक भोजन करें।

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