Latest Updates
-
पुरानी कब्ज और बवासीर से पाना है छुटकारा, तो इस पौधे की जड़ का करें इस्तेमाल -
वजन कम करने के लिए रोटी या चावल क्या है बेस्ट? करना है वेट लॉस तो जान लें ये 5 बातें -
दीपिका पादुकोण ने शेयर की सेकंड प्रेगनेंसी की गुड न्यूज, 40 की उम्र में मां बनना है सेफ -
Chardham Yatra करने से पहले पढ़ लें ये 5 बड़े नियम, इन लोगों को नहीं मिलेगी यात्रा की अनुमति -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 10 रुपये के नमक का ये टोटका, रातों-रात बदल देगा आपकी किस्मत -
Akshaya Tritiya Wishes: घर की लक्ष्मी को इन खूबसूरत संदेशों के जरिए कहें 'हैप्पी अक्षय तृतीया' -
Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद -
Parshuram Jayanti 2026 Wishes: अधर्म पर विजय...इन संदेशों के साथ अपनों को दें परशुराम जयंती की शुभकामनाएं -
Akshaya Tritiya 2026 Wishes: सोने जैसी हो चमक आपकी...अक्षय तृतीया पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Akshaya Tritiya Wishes For Saasu Maa: सासू मां और ननद को भेजें ये प्यार भरे संदेश, रिश्तों में आएगी मिठास
Zakat & Fitra In Hindi: रमजान में जकात और फितरा देना क्यों है जरूरी? जानिए दोनों में क्या है अंतर
Zakat & Fitkra In Hindi: रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए बरकतों वाला होता है। रमजान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जो शाबान के बाद आता है। इस पूरे महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं, पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं, तरावीह पढ़ते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं। इबादतों के साथ-साथ रमजान में जकात और फितरा अदा करना भी मुसलमान पर फर्ज होता है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। पांच बुनियादी स्तंभों ईमान, नमाज, रोज़ा, जकात और हज का उल्लेख हदीसों में मिलता है, जिनकी तालीम पैगम्बर मोहम्मद ने दी। हालांकि जकात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन रमजान में इसका सवाब कई गुना बढ़ने की बात रिवायतों में आती है, इसलिए बहुत से लोग इसी महीने में जकात अदा करते हैं। वहीं, फितरा ईद-उल-फितर से पहले अदा किया जाता है, ताकि जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में शरीक हो सकें। आइए, जानते हैं रमजान में जकात और फितरा देने के महत्व के बारे में -

जकात क्या है?
कात हर उस मुसलमान के लिए जरूरी है, जो हैसियतमंद है। साल भर की कमाई से जो बचत होती है, उसका 2.5 फीसदी हिस्सा गरीबों या जरूरतमंदों को दान करना, जकात कहलाता हैं। जकात सिर्फ रमजान में ही नहीं देना जरूरी होता, बल्कि आप किसी जरूरतमंद को किसी भी महीने दे सकते हैं। जकात खासकर विधवा महिलाओं, अनाथ बच्चों या बीमार व्यक्ति को दी जाती है।
फितरा क्या है?
फितरा, जिसे सदक़ा-ए-फित्र भी कहा जाता है, रमजान के आखिर में ईद-उल-फितर की नमाज से पहले देना होता है। 1 किलो 633 ग्राम गेहूं या 1 किलो गेहूं की कीमत किसी गरीब के देना, फितरा कहलाता है। यह हर उस व्यक्ति को देना होता है, जिसके पास अपनी जरूरतों से ज्यादा पैसा हो।
जकात और फितरा में अंतर
कई लोग जकात और फितरा को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग इबादतें हैं। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और यह साल की आमदनी में से 2.5 फीसदी देना तय है और यह हर मुसलमान पर फर्ज़ है। वहीं फितरा अपनी हैसियत के हिसाब से दिया जाता है। इसकी कोई सीमा नहीं होती है
रमजान में जकात और फितरा देने का महत्व
रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है। इस मुबारक महीने में ऐसे लोग भी रोजा रखते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर होती है। ऐसे में, जकात और फितरा किसी गरीब के लिए राहत से कम नहीं होता। इसीलिए इस बरकतों वाले महीने में जकात और फितरा देना सुन्नत है।



Click it and Unblock the Notifications











