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Zakat & Fitra In Hindi: रमजान में जकात और फितरा देना क्यों है जरूरी? जानिए दोनों में क्या है अंतर
Zakat & Fitkra In Hindi: रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए बरकतों वाला होता है। रमजान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जो शाबान के बाद आता है। इस पूरे महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं, पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं, तरावीह पढ़ते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं। इबादतों के साथ-साथ रमजान में जकात और फितरा अदा करना भी मुसलमान पर फर्ज होता है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। पांच बुनियादी स्तंभों ईमान, नमाज, रोज़ा, जकात और हज का उल्लेख हदीसों में मिलता है, जिनकी तालीम पैगम्बर मोहम्मद ने दी। हालांकि जकात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन रमजान में इसका सवाब कई गुना बढ़ने की बात रिवायतों में आती है, इसलिए बहुत से लोग इसी महीने में जकात अदा करते हैं। वहीं, फितरा ईद-उल-फितर से पहले अदा किया जाता है, ताकि जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में शरीक हो सकें। आइए, जानते हैं रमजान में जकात और फितरा देने के महत्व के बारे में -

जकात क्या है?
कात हर उस मुसलमान के लिए जरूरी है, जो हैसियतमंद है। साल भर की कमाई से जो बचत होती है, उसका 2.5 फीसदी हिस्सा गरीबों या जरूरतमंदों को दान करना, जकात कहलाता हैं। जकात सिर्फ रमजान में ही नहीं देना जरूरी होता, बल्कि आप किसी जरूरतमंद को किसी भी महीने दे सकते हैं। जकात खासकर विधवा महिलाओं, अनाथ बच्चों या बीमार व्यक्ति को दी जाती है।
फितरा क्या है?
फितरा, जिसे सदक़ा-ए-फित्र भी कहा जाता है, रमजान के आखिर में ईद-उल-फितर की नमाज से पहले देना होता है। 1 किलो 633 ग्राम गेहूं या 1 किलो गेहूं की कीमत किसी गरीब के देना, फितरा कहलाता है। यह हर उस व्यक्ति को देना होता है, जिसके पास अपनी जरूरतों से ज्यादा पैसा हो।
जकात और फितरा में अंतर
कई लोग जकात और फितरा को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग इबादतें हैं। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और यह साल की आमदनी में से 2.5 फीसदी देना तय है और यह हर मुसलमान पर फर्ज़ है। वहीं फितरा अपनी हैसियत के हिसाब से दिया जाता है। इसकी कोई सीमा नहीं होती है
रमजान में जकात और फितरा देने का महत्व
रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है। इस मुबारक महीने में ऐसे लोग भी रोजा रखते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर होती है। ऐसे में, जकात और फितरा किसी गरीब के लिए राहत से कम नहीं होता। इसीलिए इस बरकतों वाले महीने में जकात और फितरा देना सुन्नत है।



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