Latest Updates
-
Eid Kab Hai 2026: भारत में किस दिन दिखेगा ईद का चांद? नोट कर लें ईद-उल-फितर की तारीख -
T20 World Cup 2026: क्या टीम इंडिया फिर रचेगी इतिहास? जानें क्या कहती है डॉ. वाई राखी की भविष्यवाणी -
क्या आप भी हैं 'सुपरवुमन सिंड्रोम' की शिकार? जानें इसका सच और बचने के तरीके -
Women’s Day Wishes For Girlfriend: नारी है शक्ति...इन संदेशों से अपनी गर्लफ्रेंड को दें महिला दिवस की शुभकामना -
Women's Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं फॉलो करें ये हेल्थ टिप्स, कई बीमारियों से होगा बचाव -
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर कर लिए ये अचूक उपाय तो चमक जाएगी किस्मत, वैवाहिक जीवन रहेगा खुशहाल -
8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और इस साल की थीम -
Rang Panchami 2026: कब है रंग पंचमी? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व -
पेट के कैंसर के शुरुआती स्टेज में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, ज्यादातर लोग साधारण समझकर करते हैं इग्नोर -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होगी हर परेशानी
Eid Milad-un-Nabi 2025: कब है ईद-ए-मिलाद- उन-नबी? जानिए इस दिन नमाज पढ़ने का सही तरीका और नियत
Eid Milad-un-Nabi 2025 ki Namaz : इस्लाम धर्म में कई पर्व और त्योहार अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। उन्हीं में से एक है ईद-मिलाद-उन-नबी, जिसे बारावी शरीफ और ईद-ए-मिलाद के नाम से भी जाना जाता है।
यह पर्व पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार पैगंबर मुहम्मद का जन्म रबी-उल-अव्वल महीने की 12वीं तारीख को हुआ था। इस दिन मुस्लिम समुदाय एकजुट होकर अल्लाह का शुक्रिया अदा करता है और पैगंबर की शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में अमल करने का संकल्प लेता है।

ईद-मिलाद-उन-नबी कब है 2025 में
इस साल ईद-मिलाद-उन-नबी 5 सितंबर 2025 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है, इसलिए हर साल इस त्योहार की ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख बदल जाती है। सुन्नी मुस्लिम समुदाय इसे 12वीं रबी-उल-अव्वल को मनाते हैं। वहीं शिया मुसलमान इसे 17वीं रबी-उल-अव्वल को मनाते हैं।
इस अंतर के बावजूद दोनों ही समुदाय इस दिन को पैगंबर मुहम्मद के जीवन, उनकी शिक्षाओं और समाज सुधार में उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।
ईद-मिलाद-उन-नबी क्यों मनाई जाती है
ईद-मिलाद-उन-नबी का त्योहार पैगंबर मुहम्मद साहब की याद में मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद को अल्लाह का अंतिम दूत माना जाता है। उन्होंने इंसानियत, भाईचारे, बराबरी और न्याय का संदेश दिया। कुरान शरीफ में उन्होंने अल्लाह की शिक्षाओं को दर्ज किया और पूरी मानव जाति को नेक राह पर चलने की शिक्षा दी।
इतिहास के अनुसार, 10वीं सदी में सबसे पहले इस दिन को त्योहार के रूप में मनाया गया। धीरे-धीरे यह परंपरा फैली और 13वीं सदी तक पूरी दुनिया के मुसलमान इस दिन को बड़े उत्साह से मनाने लगे। यह दिन सिर्फ जश्न का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और इंसानियत की राह पर चलने का संकल्प लेने का दिन माना जाता है।
ईद-मिलाद-उन-नबी पर नमाज पढ़ने का तरीका
- इस दिन मुसलमान खास तौर पर नमाज अदा करते हैं और पैगंबर मुहम्मद को याद करते हैं।
- नमाज से पहले शरीर का पाक (शुद्ध) होना आवश्यक है।
- साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है।
- नमाज पढ़ते समय किबला (मक्का की दिशा) की ओर मुंह करना चाहिए।
- नमाज की नियत (इरादा) करना जरूरी है।
नियत के अल्फाज
"नियत की मैंने दो रकात नमाज सुन्नत वकत फजर का, वास्ते अल्लाह ताला के लिए, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ - अल्लाहु अकबर।"
इसके बाद मुसलमान "सना" और "सुबहाना कल्ला हुम्मा" पढ़ते हुए नमाज पूरी करते हैं। यह प्रक्रिया आत्मिक शुद्धि और अल्लाह से नजदीकी का प्रतीक मानी जाती है।
ईद-मिलाद-उन-नबी के दिन क्या करते हैं
इस दिन की खासियत केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसे सामाजिक एकता और मानवता के संदेश के साथ मनाया जाता है।
प्रार्थना और नमाज: अल्लाह से दुआ की जाती है और पैगंबर की शिक्षाओं को याद किया जाता है।
जुलूस और जलसा: कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय बड़े जुलूस निकालते हैं, जिसमें पैगंबर के जीवन और उनके संदेशों का प्रचार किया जाता है।
जरूरतमंदों की मदद: गरीबों और वंचितों को खाना खिलाना, दान देना और जरूरतमंदों की सहायता करना इस दिन का अहम हिस्सा है।
शिक्षाओं को दोहराना: कुरान में दर्ज पैगंबर की शिक्षाओं को पढ़ा और साझा किया जाता है ताकि लोग सही मार्ग पर चलें।
ईद-मिलाद-उन-नबी का महत्व
यह त्योहार मुसलमानों के लिए केवल खुशी का दिन नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण का भी दिन है। इस दिन वे यह संकल्प लेते हैं कि पैगंबर मुहम्मद द्वारा बताई गई राहों पर चलेंगे। चाहे वह इंसानियत हो, भाईचारा हो या फिर दया और ईमानदारी-पैगंबर की हर शिक्षा जीवन में उतारना ही इस दिन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।



Click it and Unblock the Notifications











