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Ganesh Chaturthi 2025: उत्तराखंड की 90 फीट गहरी गुफा में रखा है गणेशजी का कटा हुआ सिर, जानें पूरी कहानी
Where is Lord Ganesha Head : भारत का हर कोना रहस्यों और पौराणिक कथाओं से भरा हुआ है। उत्तराखंड की वादियों में बसी पाताल भुवनेश्वर गुफा ऐसा ही एक दिव्य और अद्भुत स्थल है। मान्यता है कि जब भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया था, तब माता पार्वती के आग्रह पर उन्होंने हाथी का मस्तक लगाकर गणेशजी को पुनर्जीवित किया। इसके बाद भगवान शिव ने कटे हुए सिर को इस गुफा में सुरक्षित रखा।
इसी कारण यह गुफा आज भी गणेशभक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। आइए गणेश चतुर्थी के मौके पर जानते हैं कि गणेश जी का सिर कहा रखा गया है और यह जगह कहां है?

90 फीट गहराई में स्थित रहस्यमयी गुफा
पाताल भुवनेश्वर गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। यह गुफा पहाड़ के लगभग 90 फीट अंदर है और अंदर जाने के लिए संकरी सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है। यहां भगवान गणेश की शिलामूर्ति विराजमान है जिसे आदि गणेश के नाम से पूजा जाता है। मान्यता है कि इस गुफा का उल्लेख स्कंद पुराण के मानस खंड में भी मिलता है।
गुफा की खोज
ऐसा कहा जाता है कि इस गुफा की खोज सबसे पहले त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण ने की थी। वे शिकार करते-करते यहां पहुंचे और गुफा के अंदर महादेव समेत तैंतीस कोटि देवताओं के दर्शन किए। बाद में 1191 ईस्वी में आदि शंकराचार्य ने इस गुफा को पुनः जगत के सामने प्रस्तुत किया और इसे आध्यात्मिक दृष्टि से प्रसिद्धि दिलाई।
कलियुग के अंत से जुड़ी मान्यता
गुफा के भीतर चार युगों का प्रतीक स्वरूप चार पत्थर मौजूद हैं। इनमें से एक पत्थर धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है जिसे कलियुग का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह पत्थर हर हजार साल में एक बार ऊपर उठता है और जिस दिन यह पत्थर गुफा की छत से टकरा जाएगा, उसी दिन कलियुग का अंत हो जाएगा।
तैंतीस कोटि देवताओं का वास
पाताल भुवनेश्वर गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव और गणेशजी के साथ-साथ तैंतीस कोटि देवी-देवता विराजमान हैं। इस गुफा के भीतर बद्रीनाथ, केदारनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं। बद्रीनाथ में बद्री पंचायत की शिला रूप मूर्तियां देखी जा सकती हैं जिनमें यम, कुबेर, वरुण, लक्ष्मी, गरुड़ और गणेशजी शामिल हैं।
गणेशजी के मस्तक पर टपकती है दिव्य बूंद
गुफा में भगवान गणेश की शिलामूर्ति पर ब्रह्मकमल शोभायमान है, जिसमें 108 पंखुड़ियां हैं। इस ब्रह्मकमल से दिव्य जल की बूंद लगातार भगवान गणेश के मस्तक पर गिरती रहती है। इसे भक्त आशीर्वाद स्वरूप मानते हैं और विश्वास करते हैं कि इस जल की एक बूंद मोक्ष और पुण्य प्रदान करती है।
मोक्षदायिनी गुफा
गुफा में काल भैरव की जीभ भी दिखाई देती है। मान्यता है कि यदि कोई भक्त काल भैरव के मुंह से प्रवेश कर उनकी जीभ पर चलकर पूंछ तक पहुंच जाए, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस गुफा को मोक्षदायिनी गुफा भी कहा जाता है।



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