Latest Updates
-
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी -
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश
हज यात्रा में हुई मौत के बाद परिवार वाले क्यों मना रहे हैं जश्न? सऊदी अरब से क्यों नहीं मांग सकते अपनों का शव
Hajj Yatra Me Mrityu Shubh Ya Ashubh: इस वर्ष देश ही नहीं दुनियाभर में गर्मी अपना कहर बरपा रही है। इस गर्मी का प्रकोप हज यात्रा पर भी दिखा जहां इस वर्ष 1300 से अधिक हज यात्रियों की मौत हुई। इस वर्ष 18 लाख से अधिक लोग हज यात्रा पर आएं। हज यात्रा इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्रा होती है।
सऊदी अरब में स्थित पवित्र शहर मक्का में यह यात्रा होती है जहाँ काबा नाम की घनाकार इमारत की इबादत एवं उसके चक्कर लगाए जाते हैं। इस वर्ष भारत से गए यात्रियों में से अबतक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। इंडोनेशिया के एक हज यात्री की मौत के बाद उनके बच्चे इस बात को लेकर खुश हैं कि उनके पिता ने मक्का की सबसे पाक़ धरती पर अपनी अंतिम सांस ली।

शव नहीं भेजा जाता वापिस उनके देश (Hajj Pilgrims Death Rules in Saudi Arab)
हज यात्रा के दौरान यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति का शव वापिस उसके देश नहीं भेजा जाता। दरअसल हज यात्रा की शुरुआत में भरे जाने वाले फॉर्म में ही इस बात पर साइन ले लिए जाते हैं कि मृत्यु के बाद शव को सऊदी अरब में ही दफना दिया जाएगा। इसमें उनके परिवार या किसी और की भी आपत्ति भी स्वीकार नहीं की जाती। प्राकृतिक कारणों से हुई मौत के केस में सऊदी अरब सरकार किसी मुआवज़े को देने की भी ज़िम्मेदार नहीं होती। व्यक्ति की पूरी ज़िम्मेदारी उसकी खुद की होती है। मक्का के आस पास के कब्रिस्तान में ही शव दफनाया जाता है। उनकी कब्र पर किसी तरह की पट्टी नहीं लगाई जाती, हालांकि उसपर एक नंबर दिया जाता है जिससे परिवारजन आकर कब्र पर जा सके।
मक्का की धरती पर दफनाया जाना पाक़ मानते हैं हजयात्री
इस्लाम धर्म में मक्का को सबसे पाक़/पवित्र माना गया है। हज यात्रा के दौरान मृत्यु होकर मक्का या मदीना की भूमि में दफ़न होना मुस्लिम धर्म के लोगों में सौभाग्य का अहसास दिलाता है। इसलिए कई मृत लोगों के परिवार अपने को खोने के ग़म में भी इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि उनके परिवारजन को अंतिम समय में मक्का की ज़मीन नसीब हुई। कई लोगों का मानना है कि मक्का की धरती पर अंतिम सांस लेने से आत्मा को शान्ति मिलती है और इसे अल्लाह की नेमत माना जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications