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Janmashtami 2025 Sanskrit Wishes : जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें भक्ति और प्रेम से भरी संस्कृत शुभकामनाएं
Happy Krishna Janmashtami 2025 Wishes in Sanskrit : जन्माष्टमी का पर्व हर साल भक्तों के लिए अपार उत्साह और भक्ति का संदेश लेकर आता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में मथुरा में जन्म लेकर धर्म की पुनः स्थापना की थी।
इस अवसर पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, झांकियां और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। भक्त उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि के समय श्रीकृष्ण जन्म लीला का दर्शन करते हैं। लोग अपने परिजनों और मित्रों को शुभकामनाएं देते हैं। यदि आप भी इस बार खास तरीके से बधाई देना चाहते हैं, तो संस्कृत भाषा में संदेश, श्लोक और मंत्र भेजकर जन्माष्टमी को और यादगार बना सकते हैं।

Happy Krishna Janmashtami 2025 Sanskrit Wishes (जन्माष्टमी की शुभकामनाएं संस्कृत में )
1. सुखवसाने त्विदमेव सारं दुखवसाने त्विदमेव गयम्।
देहावसाने त्विदमेव जप्यं गोविंद दामोदर माधवेति॥
जय श्रीकृष्णः! जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ: सुख के अंत में भी यही सार है, दुःख के अंत में भी यही गाथा है, और देह के अंत में भी यही जप है-गोविंद, दामोदर, माधव!
संदेश: जय श्रीकृष्णः! जन्माष्टमी महोत्सव की शुभकामनाएं।
2. सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
श्रीकृष्णः सर्वत्र रक्षतु। जन्माष्टमी शुभकामनाः।
अर्थ: सभी सुखी रहें, सभी रोगमुक्त रहें, और श्रीकृष्ण सबकी रक्षा करें।
3. करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् ।
वटस्य पत्रस्य पुटेशयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥
राधे राधे
अर्थ : अपने कमल जैसे हाथों से कमल जैसे चरणों को, और उन चरणों को कमल जैसे मुख में रखे हुए, वट के पत्ते पर लेटे बाल मुकुंद का मैं मन से स्मरण करता हूँ।
4. भगवान् कृष्णः भवन्तं भवतः कुटुम्बं च प्रीणातु।
कृष्णजन्माष्टम्याः अवसरे भवतः कुटुम्बस्य च कृते अहम् आनन्दं सौहार्दं समृद्धिं च कान्क्ष्ये।
Happy Janmashtami 2025
अर्थ: भगवान कृष्ण आपको और आपके परिवार को प्रसन्न करें। जन्माष्टमी के अवसर पर मैं आपके परिवार के लिए आनंद, सौहार्द और समृद्धि की कामना करता हूँ।
5. भगवान् कृष्णः भवन्तं भवतः कुटुम्बं च प्रीणातु।
कृष्णजन्माष्टम्याः अवसरे भवतः कुटुम्बस्य च कृते अहम् आनन्दं सौहार्दं समृद्धिं च कान्क्ष्ये।
जन्माष्टमी महोत्सवः सर्वेभ्यः सुखम् आनयतु।
अर्थ : भगवान कृष्ण आपको और आपके परिवार को प्रसन्न करें, और यह जन्माष्टमी महोत्सव सभी के लिए सुख लाए।
6. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। कर्मफल का कारण मत बनो, और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।

7. वासुदेवः परं ब्रह्म तन्मूर्तिः पुरुषः परः।
अव्यक्तो निर्गुणः शान्तः पञ्चविंशात् परोऽव्ययः॥
जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ : वासुदेव परम ब्रह्म हैं। इन्हीं की मूर्ति परम पुरुष है। ये अव्यक्त, निर्गुण, शान्त और (सांख्य में वर्णित) २५ तत्त्वों से परे हैं तथा अव्यय हैं, अर्थात् निर्विकार हैं।

8. वन्दे कृष्णं गुणातीतं परं ब्रह्माच्युतं यतः।
आविर्बभूवुः प्रकृतिब्रह्मविष्णुशिवादयः॥
जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ: जिनसे प्रकृति, ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव आदि का आविर्भाव हुआ है, उन त्रिगुणातीत परब्रह्म परमात्मा अच्युत श्रीकृष्ण की मैं वंदना करता हूं। जन्माष्टमी की शुभकामना
9. कस्तूरि तिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभम्
नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम् ।
सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिम्
गोपस्त्री परिवेष्ठितो विजयते गोपाल चूडामणिम् ॥
जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ: हे गोपाल! मस्तक पर कस्तूरी तिलक, वक्ष पर कौस्तुभ मणि, नासिका में मोती, कर में बांसुरी, कलाई में कंगन, चंदन-सुगंधित तन और मोतियों के हार से विभूषित आप गोपियों में मस्तकमणि समान शोभित हैं। कृष्ण जन्मोत्सव की बधाई
10. आदौ देवकी देवगर्भ जननं गोपीगृहे वर्धनम्
मायापूतन जीवितापहरणं गोवधर्नोद्धारणम् ।
कंसच्छेदन कौरवादि हननं कुन्तीतनूजावनम्
एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम् ॥
जन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभाशयाः।
अर्थ: देवकी से जन्म, गोपियों संग पालन, पूतना वध, गोवर्धन धारण, कंस संहार, कौरव विनाश और पांडव रक्षा - ये श्रीकृष्ण की मनोहर लीलाएं भागवत पुराण में अमृत समान वर्णित हैं।
11. मुरलीध्वनिः हृदयम् आनन्दयतु।
जन्माष्टमी महोत्सवः सर्वेभ्यः सुखम् आनयतु।
अर्थ: भगवान श्रीकृष्ण की मुरली की मधुर ध्वनि आपके हृदय को आनंदित करे।
यह जन्माष्टमी महोत्सव सभी के लिए सुख और प्रसन्नता लेकर आए।
12. भक्तिर्मे हृदये नित्यं वर्धताम्।
श्रीकृष्णचरणे शरणं प्रपद्ये।
सर्वेषां जीवनम् आनन्दमयं भवतु।
अर्थ: अर्थ: मेरे हृदय में भक्ति निरंतर बढ़ती रहे।
मैं श्रीकृष्ण के चरणों में शरणागत होता हूँ।



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