Latest Updates
-
शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में क्यों रखी जाती है खीर? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण -
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ से पहले चेहरे पर चाहिए नेचुरल ग्लो? ट्राई करें शहनाज हुसैन के ये 5 होममेड फेस पैक -
Sharad Purnima 2026: 25 या 26 अक्टूबर, कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय -
Shamonda Virus: शमोंडा वायरस क्या है और कैसे फैलता है? फ्रांस में पहली बार इंसान संक्रमित, जांच शुरू -
बार-बार सिरदर्द होना हो सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी -
सौंफ और धनिया का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कई फायदे, जानें सेवन का सही तरीका -
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय
Teachers Day 2025 Sanskrit Wishes: गुरुजनों को संस्कृत में दें शिक्षक दिवस की बधाई
Happy Teachers Day 2025 Sanskrit Wishes : हर साल 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन में शिक्षकों की भूमिका को सम्मानित करने और उनके प्रति आभार प्रकट करने का होता है। शिक्षक ही वह मार्गदर्शक हैं, जो अपने शिष्यों को न केवल ज्ञान का प्रकाश देते हैं बल्कि जीवन की हर कठिनाई से जूझने की ताकत भी सिखाते हैं।
वे हमेशा यही चाहते हैं कि उनके विद्यार्थी उनसे आगे बढ़ें और जीवन में सफलता प्राप्त करें। यदि आप भी अपने गुरुजनों के प्रति विशेष आभार जताना चाहते हैं, तो इस दिन उन्हें संस्कृत श्लोक, विशेज, शायरी और कोट्स भेजकर शुभकामनाएं दें। यह उन्हें जरूर प्रसन्न करेगा और उनका चेहरा गर्व और खुशी से खिल उठेगा।

Teacher's Day Sanskrit Shlok Wishes (टीचर्स डे संस्कृत श्लोक)
1. गुरुरात्मवतां शास्ता शास्ता राजा दुरात्मनाम् ।
अथा प्रच्छन्नपापानां शास्ता वैवस्वतो यमः ॥
2. विना गुरुभ्यो गुणनीरधिभ्यो
जानाति तत्त्वं न विचक्षणोऽपि ।
आकर्णदीर्घायित लोचनोऽपि
दीपं विना पश्यति नान्धकारे॥
3. एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्ये निवेदयेत् ।
पृथिव्यां नास्ति तद् द्रव्यं यद्दत्वा ह्यनृणी भवेत् ॥
4. किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ॥
5. दुग्धेन धेनुः कुसुमेन वल्ली शीलेन भार्या कमलेन तोयम् । गुरुं विना भाति न चैव शिष्यः शमेन विद्या नगरी जनेन ॥
6. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
7. त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
8. विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम्।
शिक्षकस्य गुणाः सप्त सचेतस्त्वं प्रसन्नता॥
9. सर्वाभिलाषिणः सर्वभोजिनः सपरिग्रहाः।
अब्रह्मचारिणो मिथ्योपदेशा गुरवो न तु॥
10. अक्षर-अक्षर हमें सिखाते
शब्द-शब्द का अर्थ बताते
कभी प्यार से कभी डांट से
जीवन जीना हमें सिखाते !



Click it and Unblock the Notifications
