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Hariyali Teej Vrat Niyam: हरियाली तीज पर क्या आप सही विधि से व्रत रखते हैं? कहीं गलती तो नहीं कर रहे?
Hariyali Teej Vrat Niyam: हरियाली तीज सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि एक ऐसा पर्व है जो नारी सौभाग्य, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली यह तीज, विशेषकर सुहागन स्त्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार हरियाली तीज का व्रत 27 जुलाई 2025 दिन रविवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत की पूजा-विधि और नियम में जरा-सी चूक भी इसके पुण्य फल को कम कर सकती है? अगर आप हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं या रखने की सोच रही हैं, तो एक बार इन जरूरी नियमों और सही विधि को जरूर जान लें।

हरियाली तीज व्रत की विधि और नियम (Hariyali Teej Vrat Vidhi & Niyam)
1. व्रत का संकल्प और स्नान करने के लिए प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। शुद्ध वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
2. हरियाली तीज वाले दिन श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करती हैं, जैसे- चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, बिछुए आदि। और हरे रंग का वस्त्र विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
3. इन दिन शिव-पार्वती की पूजा होती है और मिट्टी या धातु की शिव-पार्वती मूर्ति की स्थापना की जाती है आप भी व्रत के फल की प्राप्ति के लिए ये करें और हल्दी, कुमकुम, पुष्प, बेलपत्र, धूप-दीप से पूजन करें। साथ ही "ॐ नमः शिवाय", "ॐ पार्वत्यै नमः" मंत्र जाप करें।
4. हरियाली तीज व्रत कथा सुनना इस दिन अनिवार्य होता है जिससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है। कथा में पार्वती जी के 108 जन्मों के बाद शिव से विवाह की गाथा सुनाई जाती है।
5. निर्जला व्रत रखना हरियाली तीज की पहचान होती है लेकिन अगर आपकी हेल्थ ठीक नहीं है तो फलाहार के साथ व्रत रख सकते हैं।
6. व्रत का पारण अगले दिन होता है, इस दिन प्रातः स्नान करके पूजन करें और फल/जल से व्रत का पारण करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान (कम लोग जानते हैं ये बातें)
अमावस्या, एकादशी या पूर्णिमा के नजदीक हो तो तिथि की शुद्धता की पुष्टि करें।
व्रत वाले दिन किसी प्रकार का झूठ, गुस्सा, या विवाद से बचें।
नाखून या बाल काटना, सिलाई-बुनाई करना वर्जित माना जाता है।
मांसाहार, लहसुन-प्याज का सेवन पूरी तरह से निषेध होता है।
माता-पिता या ससुराल के बड़े-बुज़ुर्गों से आशीर्वाद अवश्य लें।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व माता पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन से जुड़ा है। मान्यता है कि माता पार्वती ने 107 जन्मों तक कठोर तप कर भगवान शिव को अपने पति रूप में पाने की इच्छा की। 108वें जन्म में उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने पार्वती जी को पत्नी रूप में स्वीकार किया। यह दिन ही हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इस दिन महिलाएं पार्वती जी की भक्ति करके, उनके जैसे समर्पण, प्रेम और धैर्य की भावना को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेती हैं।



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