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Holi Bhai Dooj Katha: होली के बाद भाई दूज क्यों मनाते हैं? जानें भ्रातृ द्वितीया की पौराणिक कथा
Holi Bhai Dooj Katha In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, होली के बाद आने वाली द्वितीया तिथि को होली भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। इस साल 5 मार्च को होली भाई दूज मनाया जाएगा। यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक होता है। इस दिन बहन अपने भाईयों को तिलक करत उनकी लंबी आयु, स्वस्थ जीवन और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करके उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने भाईओं को घर पर आमंत्रित करती हैं, सूख नारियल भेंट करती हैं और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन करवाती हैं। मान्यता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने से भाई की आयु बढ़ती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश और यमदेव की पूजा करनी चाहिए। साथ ही, भाई दूज कथा का पाठ करना चाहिए। तो आइए, जानते हैं होली भाई दूज की कथा -

होली भाई दूज की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा से दो संतानें हुईं - यमराज और यमुना। सूर्य की तेज किरणों को सहन न कर पाने के कारण संज्ञा देवी उत्तर दिशा की ओर चली गईं। समय बीतने पर यमराज ने अपनी अलग नगरी 'यमपुरी' बसाई, जहाँ वे लोगों को उनके कर्मों के अनुसार दंड देने लगे।
जब यमुना जी ने देखा कि उनके भाई यमराज कठोर दंड दे रहे हैं, तो वे दुखी हो गईं और गोलोक चली गईं। कई वर्षों तक दोनों भाई-बहन की मुलाकात नहीं हुई। एक दिन यमराज को अपनी बहन की याद आई। उन्होंने दूतों को भेजा, लेकिन यमुना का पता नहीं चला। तब यमराज स्वयं उन्हें ढूंढने निकल पड़े।
आखिरकार मथुरा के विश्राम घाट पर उनकी मुलाकात हुई। यमुना जी अपने भाई को देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और प्रेम से भोजन कराया। बहन के स्नेह से खुश होकर यमराज ने कहा, "बहन, आज मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। तुम जो वर मांगना चाहो, मांग लो।"
यमुना जी ने कहा, "भैया, मेरा वरदान यह हो कि जो भी भाई-बहन आज के दिन प्रेम पूर्वक मिलें, बहन के घर भोजन करें और मेरे जल में स्नान करें, उन्हें अकाल मृत्यु का भय न हो और उन्हें यमपुरी न आना पड़े।"
यह सुनकर यमराज सोच में पड़ गए। तब यमुना ने फिर कहा, "यदि यह संभव न हो, तो कम से कम इतना वर दें कि जो भाई आज के दिन बहन के घर भोजन कर मथुरा के विश्राम घाट पर स्नान करें, उन्हें अकाल मृत्यु का भय न हो।" यमराज ने यह वरदान दे दिया। तभी से होली भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन से मिलने आते हैं।
होली भाई दूज की दूसरी प्रचलित कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक बूढ़ी माँ अपने बेटे और बेटी के साथ रहती थी। बेटी की शादी हो चुकी थी। होली के बाद भाई दूज का दिन आया तो बेटे ने माँ से कहा, "मां, मैं बहन के घर जाकर तिलक करवाना चाहता हूँ।"
माँ ने उसे खुशी से जाने दिया। रास्ते में एक नदी मिली। उसने कहा, "मैं तुम्हें तभी पार जाने दूंगी जब तुम मुझे वचन दोगे कि लौटते समय मुझे कुछ दोगे।"
लड़के ने वचन दे दिया। आगे एक शेर मिला। उसने भी वही शर्त रखी। फिर एक सांप मिला, उसने कहा, "वचन दो, तभी आगे बढ़ने दूंगा।" लड़के ने सबको वचन दिया और बहन के घर पहुँच गया। बहन ने तिलक किया, आरती उतारी और प्रेम से भोजन कराया।
वापस लौटते समय उसने नदी, शेर और सांप को अपना वचन निभाते हुए भेंट दी। वे सब खुश हो गए और उसे सुरक्षित जाने दिया। घर पहुँचकर उसने माँ को सब बताया। माँ ने कहा, "बेटा, वचन निभाना ही सच्चा धर्म है।" तभी भगवान विष्णु प्रकट हुए और बोले, "तुमने अपने वचन का पालन किया और बहन के प्रति अपना कर्तव्य निभाया। मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूँ कि तुम्हारा जीवन सुख, समृद्धि और लंबी आयु से भरपूर रहे।



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