सावन में ससुराल लौटना सही है या अशुभ? जानिए क्या है मान्यता

Sawan me sasural jana chahiye ya nahi : सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और विशेष माना जाता है। यह महीना भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित है और धार्मिक दृष्टिकोण से इसमें कई विशेष नियमों और परंपराओं का पालन किया जाता है।

इन परंपराओं में से एक परंपरा है, शादी के बाद पहले सावन में नवविवाहित कन्या का अपने मायके जाना। मगर कई मह‍िलाओं के मन में ये सवाल भी आता है क‍ि क्‍या सावन में मह‍िलाएं मायका छोड़कर सुसराल जा सकती है या नहीं? यहां जानें

Sawan me sasural jana chahiye ya nahi

विवाह के बाद पहले सावन में मायके जाने की परंपरा

शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, विवाह के बाद जब पहली बार सावन आता है, तो नवविवाहिता को उसके मायके भेजा जाता है। इसे शुभ और मंगलकारी माना गया है। माना जाता है कि इससे ससुराल और मायके के बीच संबंध मधुर रहते हैं, साथ ही बेटी को अपने नए जीवन से सामंजस्य बिठाने के लिए मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी मिलता है। घर की लक्ष्मी कही जाने वाली बेटी के मायके आने से वहां फिर से खुशहाली लौट आती है।

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार

ज्योतिष शास्त्र में भी इस परंपरा को महत्व दिया गया है। मान्यता है कि विवाह के बाद पहले सावन में बेटी मायके में रहकर भगवान शिव और मां गौरी की पूजा करे तो दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और पारिवारिक जीवन सुखद रहता है। इससे न केवल पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं, बल्कि घर में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण भी है रोचक

आयुर्वेद के अनुसार सावन का मौसम शरीर में रस और रक्त संचार को बढ़ाता है। इस समय शारीरिक संबंध की भावना तीव्र होती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दौरान गर्भधारण हो जाए तो गर्भ में पल रही संतान के मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होने की आशंका अधिक होती है। शायद यही कारण है कि हमारी संस्कृति में यह परंपरा बनी कि सावन में नवविवाहिताएं अपने मायके चली जाएं ताकि वे गर्भधारण से बच सकें और भविष्य में स्वस्थ संतान को जन्म दें।

क्या सावन में ससुराल जाना उचित है?

हालांकि, यह परंपरा विशेष रूप से पहले सावन के लिए कही गई है, लेकिन कई बार प्रश्न उठता है कि यदि बेटी पहले से मायके में है तो क्या उसे सावन में ससुराल लौट जाना चाहिए? इस पर कोई स्पष्ट धार्मिक निषेध नहीं है। यह पूरी तरह एक व्यक्तिगत निर्णय है। यदि स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति या अन्य कारणों से ससुराल जाना आवश्यक हो, तो जा सकती हैं। परंपराएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, लेकिन इन्हें कठोर नियम मानकर पालन करना आवश्यक नहीं।

सावन में मायके रहना शुभ माना जाता है

सावन में नवविवाहिता का मायके जाना एक सुंदर सामाजिक और धार्मिक परंपरा है, जो भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से स्त्री के कल्याण के लिए बनाई गई है। लेकिन आज के समय में इसे व्यक्ति की परिस्थितियों और स्वेच्छा के अनुसार अपनाना चाहिए। यदि किसी महिला को ससुराल लौटना पड़े तो यह अनुचित नहीं है, पर अगर संभव हो, तो पहले सावन में मायके रहना शुभ माना जाता है।

Story first published: Friday, July 11, 2025, 11:02 [IST]
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