Jagannath Story: जब भगवान् प्रभु श्री राम ने पुरी जगन्नाथ में दिए तुलसीदास को दर्शन, जानिये रोचक कथा

भगवान् जगन्नाथ विष्णु के ही रूप हैं। राम भी विष्णु के अवतार थे। तुलसी दास प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त थे। एक बार ऐसा भी हुआ कि भगवान् जगन्नाथ ने तुलसी दास को दर्शन दिए। आइये आपको बताते हैं वो रोचक कथा।

एक बार तुलसी दास जब रोजाना की तरह उस दिन भी धर्म ग्रंथो के अध्ययन में रमे हुए थे, उसी वक़्त किसी ने आकर उनको सूचना दी कि भगवान् श्री राम उन्हें पूरी जगन्नाथ में दर्शन देंगे। तुलसी दास को यकीन नहीं हुआ। लेकिन प्रभु के दर्शन की लालसा में वो खुद को रोक नहीं पाए और पुरी जगन्नाथ की तरफ चल दिए।

Jagannath Rath Yatra 2023: How Lord Jagannath Appeared As Ram To Tulsidas At Puri?

काफी समय पदयात्रा करते हुए और कई तीर्थो का भ्रमण करते हुए तुलसीदास पुरी जगन्नाथ पहुंच गए। बड़े भाव से वो मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे लेकिन वहां पहुंचते ही वो उदास हो गए। उन्होंने जगन्नाथ की लकड़ी से बनी मूर्ति देखी तो उनको काफी दुःख हुआ। तुलसीदास के मन में ये बात आई कि लकड़ी का बना देवता उनका भगवान् राम कैसे हो सकता है? दुखी तुलसीदास एक पेड़ के नीचे बैठ गए और यही सब सोचने लगे।

बहुत दूर से पदयात्रा करके अपने आराध्य के दर्शन के लिए आए और निराश हो गए। अभी वो यही सब सोच सोच कर दुखी हो रहे थे कि इतने में एक बालक उनके पास आया। उसके हाथो में प्रसाद था। बालक ने तुलसीदास को कहा प्रसाद ग्रहण करने के लिए कहा। तुलसीदास ने प्रेम पूर्वक मना कर दिया। तुलसीदास ने कहा की वो कोई भी चीज प्रभु श्री राम को अर्पण किये बिना ग्रहण नहीं करते हैं। यहां तो श्री राम हैं भी नहीं। इसलिए ये प्रसाद मैं ग्रहण नहीं कर सकता।

Jagannath Rath Yatra 2023: How Lord Jagannath Appeared As Ram To Tulsidas At Puri?

बालक ने कहा कि ये भगवान् जगन्नाथ का प्रसाद है। जगन्नाथ के पास जीभ नहीं है लेकिन वो भोजन का स्वाद लेते हैं। आप ही ने तो लिखा है राम चरित मानस में कि प्रभु की पूजा निर्गुण भी की जाती है। जगन्नाथ का स्वरुप कुछ ऐसा ही मान लीजिये। बालक को ऐसी ज्ञान भरी बातें करते देख तुलसीदास को लगा कि कहीं यही प्रभु श्रीराम तो नहीं? जब उन्होंने बालक को गौर से देखा तो बालक ने कहा "हां तुलसीदास मैं ही हूं, हनुमान मेरी रक्षा करते हैं विभीषण मुझसे मिलने आते हैं, कल आना तुम्हें हम सब दिख जायेंगे, अब प्रसाद खा लो" तुलसीदास के आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने बड़े चाव से प्रसाद ग्रहण किया। अगले दिन जब वो गर्भगृह में गए तो उन्हें प्रभु श्री राम माता सीता लक्षमण और हनुमान के दर्शन हुए।

Jagannath Rath Yatra 2023: How Lord Jagannath Appeared As Ram To Tulsidas At Puri?

जिस जगह तुलसीदास बैठे थे उस जगह को आज भी तुलसिया चौरा के नाम से जाना जाता है और जिस पेड़ के नीचे बैठे थे उस पेड़ को बडस्थामथा कहते हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Desktop Bottom Promotion