Latest Updates
-
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट
Jagannath Rath Yatra: यात्रा का पूरा फल पाने के लिए इस दिन करें भगवान जगन्नाथ के दर्शन
वो लोग बहुत सौभाग्यशाली माने जाते हैं जिन्हें पुरी जाने और वहां विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने का मौका मिलता है। यह बहुत ही पावन और भव्य आयोजन होता है जो उड़ीसा के पुरी शहर में किया जाता है।
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकलती है। हिंदू धर्म में इस रथ यात्रा की बहुत अधिक महत्ता है। यही वजह है कि इसका हिस्सा बनने की इच्छा सभी श्रद्धालुओं में होती है।
जानते हैं कि इस साल पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू होने वाली है, इस यात्रा का महत्व और साथ ही जानते हैं भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए कौन सा दिन उत्तम है।

कब शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा 2023?
इस साल रथ यात्रा का शुभारंभ 20 जून 2023 से होगा। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 19 जून 2023 को सुबह 11:25 बजे शुरू होगी और द्वितीया तिथि 01 बजे समाप्त होगी। 20 जून मंगलवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी।
क्यों निकाली जाती है रथ यात्रा?
भगवान जगन्नाथ विष्णु जी के अवतार श्रीकृष्ण के ही रूप हैं। वह अपने बड़े भईया बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी गुंडिचा के घर जाते हैं। तीनों भाई बहनों के लिए अलग अलग रथ तैयार किये जाते हैं और इसी पर सवार होकर ये गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण की छोटी बहन सुभद्रा ने नगर का भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त की थी। फिर क्या था दोनों भाई अपनी बहन के साथ नगर के सैर सपाटे के लिए निकल पड़े थे। इस दौरान वो अपनी मौसी के घर भी जाते हैं और वहां 7 दिनों तक आराम करते हैं। उनके उसी भ्रमण की व्यवस्था आज भी पूरी आस्था आज भी की जाती है। भक्त स्वयं अपने भगवान श्री कृष्ण, बलराम और देवी सुभद्रा को नगर घूमने के लिए ले जाते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा: किस दिन करने चाहिए प्रभु के दर्शन?
जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को बड़ा ही खुशनसीब माना जाता है। इस यात्रा की एक झलक पाकर ही लोगों का जीवन संवर जाता है।
कहा जाता है किस रथ यात्रा का हिस्सा बनने वाले लोगों के सारे कष्ट भगवान जगन्नाथ हर लेते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। इस रथ यात्रा की अवधि नौ दिनों की होती है। वो यात्रा के लिए निकलते हैं और मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में सात दिनों तक रहते हैं और फिर वहां से वापस आने में एक दिन का समय लग जाता है। ऐसा माना जाता है कि बीच के ये सात दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए सबसे उत्तम व लाभकारी होते हैं।
भगवान के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस यात्रा में हिस्सा लेकर रथ खींचने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आषाढ़ के महीने में पुरी तीर्थ में स्नान करने से भी भगवान की कृपा बरसती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications