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मजार के सामने क्यों रुक जाता है भगवान जगन्नाथ का रथ? जानें मुस्लिम भक्त सालबेग की अद्भुत कहानी
Why Does Jagannath Tath yatra Stop At Mazar: 16 जुलाई 2026 को जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। ये सिर्फ एक भव्य उत्सव नहीं है बल्कि भक्ति का ऐसा अनूठा संगम है जो धर्म से कहीं ऊपर है। प्रभु जगन्नाथ व उनके भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा का रथ यात्रा के दौरान कुछ समय से लिए मुस्लिम भक्त सालबेग की मजार पर रुकता है। जहां हिंदू-मुस्लिम के नाम पर विवाद होते हैं वहीं भगवान और भक्त की ये आस्था एकता और अखंडता का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो प्रभु जगन्नाथ का रथ भक्त सालबेग की मजार के सामने रुकता है, क्यों ये परंपरा सदियों से चली आ रही है।

जानें क्यों मजार के सामने रुकती है रथ यात्रा और कौन थे मुस्लिम भक्त सालबेग?
ऐसा माना जाता है कि एक सालबेग एक मुगल सूबेदार के बेटे थे। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की महिमा और चमत्कारों के बारे में कई बार सुना था। ऐसे में उनके मन में जिज्ञासा हुई कि वो पुरी प्रभु के दर्शन करें। भक्त और प्रभु के आड़े आया धर्म, क्योंकि मुस्लिम होने की वजह से सालबेग पुरी की रथयात्रा में शामिल नहीं हो सकते थे। मगर उनके मन में आस्था अटूट थी और वो भगवान जगन्नाथ के भजन-कीर्तन लिखते और गाते थे। हालांकि उनके धर्म के लोगों को इस बात से परेशानी थी लेकिन सालबेग का इसका कोई असर नहीं हुआ।
रथयात्रा में शामिल होने का बनाया मन तो पड़ गए बीमार
मान्यता है कि सालबेग में मन में जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होने की प्रबल इच्छा होने लगी। रथयात्रा निकट आई तो सालबेग बीमार पड़ गए, तो उन्होंने प्रभु से जल्द ठीक करने की प्रार्थना की ताकि वो रथयात्रा के दर्शन कर सकें। यात्रा शुरू हुई लेकिन बीमारी व कमजोरी की वजह से सालबेग मंदिर में नहीं पंहुच पाए, लेकिन प्रभु की लीला तो अनोखी है। जैसे ही रथयात्रा सालबेग की कुटिया के आगे से निकली तो वो वहां ऐसे ठहर गई मानों किसी ने पांव थाम लिए हों। पुजारी और राजा को समझ ही नहीं आया कि ये क्या हुआ है और वो परेशान होने लगे। उन्हें लगा कि ऐसा क्या अपराध हो गया है कि प्रभु की रथयात्रा आगे नहीं बढ़ रही है।
पुजारी को सपने में बताई प्रभु ने वजह
रथ को उस कुटिया के आगे खड़े हुए 7 दिन होने को आए तो प्रभु ने पुजारी के सपने में आकर वजह बताई कि वो अपने प्रिय भक्त सालबेग का इंतजार कर रहे हैं। वो बीमार है और जैसे ही वो ठीक हो जाए और दर्शन करे तो यात्रा आगे की ओर बढ़ेगी। फिर किया था सात दिन बाद जब सालबेग ठीक हुए और उन्होंने बाहर आकर प्रभु के दर्शन किए तो रथ आगे बढ़ा। ऐसे में ये वाक्या ये दर्शाता है कि भगवान की नजर में न तो जाति और न ही धर्म कोई मायने रखता है उनकी नजर में तो सच्ची भक्ति सबसे ऊपर है फिर चाहे भक्त हिंदू हो या मुस्लिम।



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