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Jaya Ekadashi Vrat Katha: जया एकादशी व्रत के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, वरना अधूरा रह जाएगा उपवास
Jaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi: आज यानी 29 जनवरी को जया एकादशी का व्रत है जिसका सनातन धर्म में विशेष महत्व है। पूरे साल में 24 एकादशी आती हैं जिनमें से 12 कृष्ण पक्ष में और 12 शुक्ल पक्ष में आती हैं। हर एकादशी का अपना विशेष महत्व माना जाता है। बात जया एकादशी की करें तो भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि यह एकादशी ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्ति दिलाने वाली और सौभाग्य प्रदान करने वाली है। जया एकादशी की कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि श्रीहरि की उस असीम कृपा का प्रमाण है जो अनजाने में किए गए व्रत से भी पिशाच योनि से मुक्ति दिला देती है।
यदि आप आज उपवास रख रहे हैं, तो इस पौराणिक कथा का पाठ अवश्य करें, क्योंकि इसके बिना आपकी पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जान लेते हैं उस पुण्य देने वाली एकादशी के बारे में जो आपको सारे पापों से मुक्ति दिलाएगी और पिशाच योनि से मुक्ति मिलेगी।

जया एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग के राजा इंद्र की सभा में माल्यवान नाम का एक गंधर्व और पुष्पवती नाम की अप्सरा थी। दोनों ही गायन और नृत्य कला में निपुण थे। एक बार इंद्र की सभा में गायन के दौरान पुष्पवती माल्यवान पर मोहित हो गई और माल्यवान भी उसकी सुंदरता को देख सुध-बुध खो बैठा। इस कारण उनका गायन और लय बिगड़ गई।देवराज इंद्र ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया कि "तुम दोनों पति-पत्नी के रूप में हिमालय पर पिशाच योनि में निवास करो।" श्राप के प्रभाव से दोनों अत्यंत कष्ट भोगने लगे। न उन्हें नींद आती थी और न ही भोजन मिलता था।
ठंड और भूख से व्याकुल होकर एक दिन माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी आई। उस दिन दुखों के कारण दोनों ने पूरे दिन कुछ नहीं खाया और रात भर जागते रहे। अनजाने में उनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। भगवान विष्णु उनके इस अनजाने उपवास से प्रसन्न हुए और सुबह होते ही दोनों पिशाच योनि से मुक्त होकर अपने पुराने दिव्य रूप में आ गए। इंद्र भी यह देखकर चकित रह गए और उन्हें पुनः स्वर्ग में स्थान दिया।
जया एकादशी पूजा विधि (Puja Vidhi)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
संकल्प: भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
पूजन: भगवान को पीले फूल, अक्षत, रोली और तुलसी दल अर्पित करें। श्रीहरि को पीला रंग अत्यंत प्रिय है।
दीप-धूप: घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
भोग: भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं (ध्यान रहे भोग सात्विक और बिना अनाज का हो)।
भगवान विष्णु की आरती
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। स्वामी दुख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम रक्षक मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी कष्ट हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
तन-मन-धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ ॥ ओम जय जगदीश हरे... ॥
जया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि: 28 जनवरी 2026 (बुधवार)।
पारण का समय: 29 जनवरी को सुबह 07:12 बजे से 09:20 बजे तक।
महत्वपूर्ण नियम (Rules to Remember)
"एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है। व्रत के दौरान मन में शुद्ध विचार रखें और किसी की निंदा न करें। पारण के समय किसी ब्राह्मण को दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है।



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