Latest Updates
-
Mango Varieties In India: तोतापुरी से लेकर बंगीनापल्ली तक, जानें भारत की प्रसिद्ध आम की किस्में और इनकी पहचान -
Heatwave Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट, जानें भीषण गर्मी का सेहत पर असर और बचाव के टिप्स -
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक का गुरु भैरवैक्य मंदिर क्यों है इतना खास? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता? -
Amarnath Yatra Registration 2026: शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे कैसे करें आवेदन, क्या हैं जरूरी डॉक्यूमेट्स
जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें सही नियम और पारण का समय
Can We Drink Water In Jitiya Vrat: हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। इसे अष्टमी तिथि पर रखा जाता है और इसका पालन खासकर उत्तर भारत और नेपाल, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बड़े श्रद्धा भाव से किया जाता है। जितिया व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है क्योंकि इसमें उपवास रखने वाली महिलाएं अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं करतीं।
यही वजह है कि अक्सर महिलाओं के मन में सवाल आता है कि क्या इस व्रत के दौरान पानी पी सकते हैं या नहीं। धार्मिक शास्त्रों में इस बारे में स्पष्ट नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है। आइए जानते हैं जितिया व्रत के नियम, इसका महत्व और इसमें पानी पीने को लेकर क्या कहा गया है।

जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं?
जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत हिन्दू धर्म का एक अत्यंत कठोर और महत्वपूर्ण उपवास है, जिसे मुख्य रूप से माताएं अपने पुत्र की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। पौराणिक नियमों के अनुसार, जितिया व्रत पूर्णतः निर्जला उपवास है। यानी इस दिन पानी भी नहीं पिया जाता। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि इस कठोर तपस्या और संयम से भगवान जीमूतवाहन प्रसन्न होते हैं और पुत्र को दीर्घायु तथा परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
कब पी सकते हैं पानी
जितिया व्रत में सूर्योदय से पहले पानी पी सकते हैं और नहाय-खाय यानी एक दिन पहले आप खाना खा सकते हैं। लेकिन जिस दिन व्रत होता है उस दिन न तो खाना खा सकते हैं और न ही पानी पी सकते हैं। व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है तो उस दिन भगवान सूर्य को जल चढ़ा और पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है और पानी व अन्न ग्रहण किया जाता है। मगर जो महिलाएं बीमार हों, गर्भवती उनके लिए छूट होती है कि वो पानी पी सकती हैं।
जितिया व्रत के नियम
- व्रत से एक दिन पहले (अष्टमी) व्रती महिलाएं निर्जला उपवास की तैयारी करती हैं और सिर्फ फलाहार करती हैं।
- नवमी तिथि को सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक अन्न और जल का त्याग किया जाता है।
- इस दौरान महिलाएं कथा सुनती और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
- दशमी तिथि की सुबह व्रत का पारण किया जाता है और तब जाकर व्रती जल और अन्न ग्रहण करती हैं।



Click it and Unblock the Notifications











