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Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत पर महिलाएं क्यों पहनती हैं सोने और चांदी के लॉकेट? जानें वजह
Jitiya Lockets Significance : जितिया व्रत, जिसे जीवितपुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, भारत के कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल की महिलाएं यह व्रत अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और इसमें महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं। यानी पूरे दिन न तो अन्न और न ही जल ग्रहण करती हैं। इस व्रत की विशेषता यह है कि इसमें महिलाओं की आस्था इतनी गहरी होती है कि वे हर साल इसे पूरे नियम और परंपरा से निभाती हैं।
इस दिन से जुड़ी एक खास परंपरा यह भी है कि कई महिलाएं सोने या चांदी के लॉकेट (ताबीज) पहनती हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर महिलाएं जितिया व्रत पर सोने-चांदी के लॉकेट क्यों धारण करती हैं? आइए जानते हैं इसके धार्मिक और पारंपरिक कारण।

1. संतान की दीर्घायु का प्रतीक
सोना और चांदी हिंदू संस्कृति में शुद्ध धातुएं मानी जाती हैं। मान्यता है कि जितिया व्रत के दिन जब महिलाएं सोने या चांदी का लॉकेट पहनती हैं, तो यह उनकी संतान के जीवन में शुभता और लंबी उम्र का प्रतीक बनता है। महिलाएं इन लॉकेट्स को अपने बच्चों की सुरक्षा कवच मानकर धारण करती हैं।
2. धार्मिक आस्था और परंपरा
जितिया व्रत के साथ जुड़ी कथाओं में भी सोने और चांदी के ताबीज का महत्व बताया गया है। बुजुर्गों का कहना है कि पहले के समय में महिलाएं लकड़ी या मिट्टी के बने प्रतीक धारण करती थीं, लेकिन समय के साथ यह परंपरा बदलकर सोने और चांदी के लॉकेट धारण करने में बदल गई। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है।
3. सुरक्षा और नकारात्मक शक्तियों से बचाव
मान्यता है कि जितिया व्रत के दौरान सोने और चांदी के लॉकेट पहनने से नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर दूर रहती हैं। खासतौर पर बच्चे जिन पर जल्दी नजर लग जाती है, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए माताएं यह लॉकेट धारण करती हैं। यह बच्चों के लिए एक तरह का रक्षा कवच माना जाता है।
4. समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक
सोना और चांदी को लक्ष्मी और चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। सोना जहां धन, ऐश्वर्य और उन्नति का द्योतक है, वहीं चांदी शांति, सौम्यता और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। इस दिन सोने-चांदी के लॉकेट पहनने का अर्थ है कि महिलाएं अपने परिवार और बच्चों के लिए सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना कर रही हैं।
5. धार्मिक कथा से जुड़ा महत्व
जितिया व्रत की कथा के अनुसार, जीमूतवाहन नागराज के पुत्र थे, जिन्होंने गरुड़ से वचन निभाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। उनकी निष्ठा और त्याग से प्रभावित होकर यह व्रत शुरू हुआ। कहा जाता है कि सोने-चांदी के लॉकेट धारण करना उसी त्याग और सुरक्षा का प्रतीक है। महिलाएं इसे पहनकर अपनी संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना करती हैं।
6. आधुनिक समय में फैशन और आस्था का संगम
आजकल महिलाएं जितिया व्रत पर सोने-चांदी के खास डिज़ाइन वाले लॉकेट पहनती हैं, जिन पर भगवान की मूर्तियां, शंख, चक्र या अन्य धार्मिक प्रतीक बने होते हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है बल्कि आधुनिक फैशन का हिस्सा भी बन चुका है। महिलाएं इसे अपनी परंपरा और आधुनिकता का मेल मानती हैं।



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