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Jitiya Vrat Katha Or Aarti: जितिया व्रत क्या है? संतान की लंबी उम्र की प्रार्थना के लिए पढ़ें कथा व आरती
Jitiya Vrat Katha Or Aarti In Hindi: हिन्दू धर्म में जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत खासतौर पर माताएं अपने संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला यह कठोर निर्जला व्रत न केवल आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह मातृत्व के त्याग और संकल्प को भी दर्शाता है। इस व्रत में माताएं पूरे दिन बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास करती हैं तथा जिमूतवाहन की कथा का श्रवण कर भगवान से अपनी संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं।
माना जाता है कि बिना कथा सुने जितिया व्रत पूर्ण नहीं होता है। ऐसे में आज हम आपके लिए जितिया व्रत की संपूर्ण कथा हिंदी में लेकर आए हैं जिसे सुन आप व्रत का पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही जितिया व्रत का महत्व भी जान लेते हैं।
जितिया व्रत कथा हिंदी में
प्राचीन समय में हिमालय पर गंधर्वराज हिमवान का निवास था। उनके यहां जिमूतवाहन नाम का एक पुत्र जन्मा। वह बहुत ही धर्मात्मा, दयालु और परोपकारी था। युवावस्था में ही उसने राज्य और भोग-विलास त्याग दिया और अपने पिता से कहकर वह जंगल में तपस्या करने चला गया। उस समय एक प्रथा थी कि गरुड़ प्रतिदिन एक नागवंश के बच्चे को भोजन के रूप में ले जाता था। नाग जाति इस परंपरा से बहुत दुखी थी। एक दिन नागराज के पुत्र की बारी आई। नागकुमार को देखकर उसकी माता बहुत रोई, परंतु परंपरा के कारण पुत्र को गरुड़ के लिए तैयार करना पड़ा।

जिमूतवाहन का त्याग
जिमूतवाहन ने जब यह दृश्य देखा तो उसका हृदय करुणा से भर गया। उसने नागमाता से कहा, माता! आप चिंता न करें। मैं आपके पुत्र के स्थान पर गरुड़ को अपने प्राण दूंगा। इतना कहकर जिमूतवाहन स्वयं शिला पर लेट गया और गरुड़ के आने की प्रतीक्षा करने लगा। कुछ समय बाद गरुड़ आया और उसने जिमूतवाहन को पकड़ लिया। जब उसने देखा कि यह नाग नहीं बल्कि एक मनुष्य है, तो आश्चर्यचकित हुआ। उसने पूछा - तुम कौन हो और नाग के स्थान पर यहां क्यों लेटे हो? जिमूतवाहन ने विनम्र भाव से उत्तर दिया- मैं मनुष्य हूं, लेकिन नागकुमार की जगह अपनी जान देकर उसकी मां के प्राण बचाना चाहता हूं।
गरुड़ का प्रसन्न होना
गरुड़ उसकी करुणा और त्याग से अत्यंत प्रसन्न हुआ। उसने वचन दिया कि अब वह किसी भी नाग को नहीं खाएगा और इस परंपरा को यहीं समाप्त कर देगा। इस प्रकार जिमूतवाहन के त्याग से नागवंश की रक्षा हुई और सभी नागकुमार सुरक्षित हो गए।
जितिया व्रत की आरती
आरती जीवित्पुत्रिका माता की,
जग में बड़ी अद्भुत है बाता की ।।
सुत के जीवन हेतु माताएं,
सच्चे मन व्रत नियम निभाएं ।।
फेरो आरती माँ के द्वारे,
संतान रक्षा करो हमारे ।।
जग जननी सब दुख हरनी,
सुत की आयु बढ़ाओ वरनी ।।
भक्तों पर यह कृपा बरसाओ,
सुत को लंबी उमर दिलाओ ।।
आरती जीवित्पुत्रिका माता की,
जग में बड़ी अद्भुत है बाता की ।।
व्रत का महत्व
जिमूतवाहन के इस अत्यंत करुणा और त्यागमयी कार्य के कारण ही माताएं यह व्रत करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की दीर्घायु होती है। बच्चों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां के त्याग और श्रद्धा से भगवान संतानों को निरोगी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।



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