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Jitiya Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है जितिया निर्जला व्रत, संतान की लंबी उम्र के लिए पढ़ें यह कथा
Jitiya Vrat Katha: जीवित्पुत्रिका व्रत हिन्दू धर्म का एक ख़ास व्रत है जिससे संतान की दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यह पर्व आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नौवीं तिथि के बीच मनाया जाता है। इस वर्ष 5 से 7 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा।
5 अक्टूबर को नहाए खाए से पर्व की शुरुआत होगी। उसके बाद 6 तारीख को व्रत रखा जाएगा, वहीं अगले दिन 7 को व्रत पारण किया जाएगा। इस व्रत को पूरा करने से संतान को भगवान कृष्ण की रक्षा प्राप्त होती है। पूरी विधि से इस व्रत को पूरा करने के साथ साथ जितिया व्रत की कथा सुनना ज़रूरी है। पेश है जितिया व्रत कथा -

जितिया व्रत कथा
गंधर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन अपने परोपकार और पराक्रम के लिए जाने जाते थे। एक बार जीमूतवाहन के पिता उन्हें राज सिंहासन की ज़िम्मेदारी सौंपकर वन में तपस्या के लिए चले गए। लेकिन जीमूतवाहन का मन राज-पाट में नहीं लगा। इस कारण वे अपने भाइयों को राजपाट की जिम्मेदारी सौंप कर अपने पिता के पास उनकी सेवा के लिए चले गए।
वहाँ वन में जीमूतवाहन का विवाह मलयवती नाम की कन्या से हुआ। एक दिन वन में भ्रमण करते हुए उनकी भेंट एक वृद्ध स्त्री से हुई, जो नागवंश से थी। वृद्ध महिला काफी ज्यादा परेशान और डरी हुई दिखाई पड़ी। उसकी ऐसी हालत देखकर जीमूतवाहन ने उनकी समस्या पूछी। तब वृद्धा ने बताया कि नागों ने पक्षीराज गरुड़ को यह वचन दिया है कि वे प्रत्येक दिन एक नाग को उनके आहार के रूप में उन्हें देंगे। उस स्त्री ने रोते हुए बताया कि उसका एक बेटा है, जिसका नाम शंखचूड़ है। आज उसे पक्षीराज गरुड़ के पास आहार के रूप में जाना है।

जीमूतवाहन ने वृद्धा की हालत देखकर उसे आश्वासन दिया कि वो उसके पुत्र के प्राणों की रक्षा करेंगे। वचन के अनुसार, जीमूतवाहन पक्षीराज गरुड़ के समक्ष प्रस्तुत हुए और गरुड़ उन्हें अपने पंजों में दबोच कर आहार के रूप में ले गए। उस दौरान उन्होंने जीमूतवाहन के कराहने की आवाज सुनी और वे एक पहाड़ पर रुक गए, जहां जीमूतवाहन ने उन्हें पूरी घटना बताई।
पक्षीराज गरुड़ जीमूतवाहन के साहस और परोपकार भाव को देखकर प्रसन्न हो गए, जिस वजह से उन्होंने जीमूतवाहन को प्राणदान दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे अब किसी नाग को अपना आहार नहीं बनाएंगे। तभी से जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन संतान की रक्षा और उन्नति के लिए जीमूतवाहन की पूजा का विधान है, जिसे लोग आज जितिया व्रत के नाम से भी जानते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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