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Kajari Teej Vrat Katha In Hindi: कजरी तीज पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान
Kajari Teej Vrat Katha In Hindi: 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज का पर्व मनाया जाएगा। ये सावन के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कजरी तीज को 'सातुड़ी तीज' या 'बड़ी तीज' भी कहा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। साथ ही अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
व्रत के दिन महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार कर, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करती हैं और पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करतीं। कजरी तीज की कथा सुनना और सुनाना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि मान्यता है कि कथा श्रवण के बिना व्रत अधूरा रहता है। कथा में देवी पार्वती की कठिन तपस्या और भगवान शिव से अखंड सौभाग्य प्राप्त करने का वर्णन मिलता है। आपके लिए कजरी तीज व्रत कथा हम लेकर आ रहे हैं, आइए जान लेते हैं कि कजरी तीज व्रत कथा जिसे पढ़ आप भी पाएं अखंड सौभाग्य का वरदान।

कजरी तीज व्रत कथा
बहुत समय पहले एक नगर में एक साहूकार अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनके कोई संतान नहीं थी। कई वर्षों तक भगवान से प्रार्थना करने के बाद उन्हें एक पुत्री का आशीर्वाद मिला। बेटी बहुत ही सुंदर, गुणी और धर्मपरायण थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो उसका विवाह एक योग्य युवक से कर दिया गया। विवाह के बाद वह अपने ससुराल आ गई। उसके मायके में बड़े प्रेम से उसका ध्यान रखा जाता था, इसलिए जब भी वह अपने मायके आती, मायकेवाले उसे ढेर सारे पकवान और मिठाइयां देते थे।
एक बार सावन के महीने में कजरी तीज का पर्व आया। इस दिन विवाहित स्त्रियां मायके से अपने ससुराल के लिए "सिंजारा" (सिंदूर, श्रृंगार सामग्री और पकवान) भेजती हैं। साहूकार की बेटी भी अपने ससुराल के लिए पकवान तैयार करने लगी। लेकिन इस बार घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। घर में खाने के लिए भी मुश्किल से अनाज था। फिर भी उसने कजरी तीज का व्रत रखा और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने के बाद थोड़े से चने और गुड़ से सिंजारा तैयार किया।
ससुराल में, उसकी सास ने जब ये सादा पकवान देखे तो नाराज होने के बजाय भावनाओं को समझा और बोलीं "बेटी, तुमने सच्चे मन से जो भेजा है, वही हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है।" मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन, श्रद्धा और प्रेम से करने पर भगवान शिव और माता पार्वती अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि विवाहित स्त्रियां कजरी तीज पर व्रत रखकर कथा सुनती हैं और अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।



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