Latest Updates
-
Google Birthday 2026: क्या आप जानते हैं 27 सितंबर को ही क्यों बर्थडे मनाता है गूगल? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप -
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष का पहला दिन आज या कल? जानें किस दिन किस पितर का करें श्राद्ध -
World Contraception Day 2026: गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं? जानें इसके फायदे और नुकसान -
Pitru Paksha 2026: बेटा न हो तो क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान? अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दिया जवाब -
World Lung Day 2026: शरीर में दिखें ये 7 लक्षण तो समझ जानें आपके फेफड़े हो रहे हैं खराब -
Anant Chaturdashi 2026: अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों बांधी जाती हैं? जानें इसका धार्मिक महत्व -
Mushtaq Khan Family: 'वेलकम' फेम मुश्ताक खान ने दुनिया को कहा अलविदा, जानिए एक्टर के परिवार में कौन-कौन? -
डायबिटीज में चावल और रोटी खाने का सही समय क्या है? जानें कब खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
Anant Chaturdashi Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट -
Anant Chaturdashi 2026 Wishes: श्री हरि का आशीष...इन संदेशों के साथ अपनों को दें अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं
Kamada Ekadashi Vrat Katha: कामदा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान विष्णु की कृपा से पूरी होगी हर इच्छा
Kamada Ekadashi 2026 Vrat Katha: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। इसे फलदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह व्रत 29 मार्च 2026 को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पूजा के दौरान कामदा एकादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि कथा का पाठ करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तो आइए, पढ़ते हैं कामदा एकादशी की व्रत कथा -

कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamada Ekadashi 2026 Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में भोगीपुर नाम का एक सुंदर नगर था, जहां पुंडरीक नाम के राजा राज करते थे। उस नगर में अप्सराएं, किन्नर और गंधर्व भी रहते थे। उनमें से ललिता और ललित नाम के पति-पत्नी भी थे, जिनके बीच अटूट प्रेम था। दोनों हमेशा एक-दूसरे के ख्यालों में डूबे रहते थे। एक दिन की बात है, राजा पुंडरीक अपनी राजसभा में बैठे थे और मनोरंजन चल रहा था। उस समय ललित गान कर रहा था, लेकिन उसकी पत्नी ललिता वहां नहीं थी। गाते-गाते उसे अपनी पत्नी की याद आने लगी। अतः उसके पैरों की गति रुक गयी और जीभ लड़खड़ाने लगी।
सभा में मौजूद कर्कोटक नाग ने यह बात देख ली और राजा को बता दी। यह सुनकर राजा को बहुत क्रोध आया। उन्होंने ललित को शाप दे दिया कि "तू अपनी पत्नी के मोह में इतना डूब गया है कि अपना कर्तव्य भूल गया, इसलिए तू राक्षस बन जा।" राजा के श्राप देते ही ललित भयानक राक्षस बन गया। उसका रूप बहुत डरावना हो गया।
अपने पति को इस हालत में देखकर ललिता बहुत दुखी हुई। वह उसे इस श्राप से मुक्त कराने के लिए जंगलों, पहाड़ों और आश्रमों में भटकने लगी। भटकते-भटकते वह ऋषि श्रृंगी के आश्रम पहुंची। वहां जाकर वह रोने लगी और ऋषि के चरणों में गिरकर अपनी पूरी कहानी सुनाई। उसने उनसे अपने पति को श्राप से मुक्त करने का उपाय पूछा। ऋषि श्रृंगी उसकी भक्ति और प्रेम से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामदा एकादशी का व्रत बहुत फलदायी होता है। अगर तुम यह व्रत सच्चे मन से करो और इसका पुण्य अपने पति को अर्पित कर दो, तो वह राक्षस रूप से मुक्त होकर फिर से गंधर्व बन जाएगा।
ललिता ने ऋषि की बात मानकर पूरे विधि-विधान से कामदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य अपने पति को अर्पित कर दिया। इसके प्रभाव से ललित का राक्षस रूप खत्म हो गया और वह फिर से गंधर्व बन गया। इसके बाद वशिष्ठ मुनि ने कहा कि कामदा एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संसार में इस व्रत के समान कोई दूसरा व्रत नहीं है।



Click it and Unblock the Notifications
