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Kharmas 2025 Date: मार्च में किस तारीख से लग रहा है खरमास? एक माह तक नहीं होगा कोई भी शुभ कार्य
Kharmas 2025 Start Date: खरमास को अशुभ मास माना जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि इस दौरान सूर्य का प्रभाव कमजोर हो जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशियों-धनु और मीन-में प्रवेश करते हैं, तो खरमास लगता है। यह पूरे एक महीने तक चलता है और वर्ष में दो बार आता है-पहला मार्च से अप्रैल के बीच और दूसरा दिसंबर से जनवरी के बीच।

2025 में खरमास कब से है?
पंचांग के अनुसार, 2025 में खरमास की शुरुआत 14 मार्च को शाम 6:59 बजे होगी, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन मीन संक्रांति भी होगी, जिससे खरमास का आरंभ होगा। इस वर्ष, खास बात यह है कि होली के दिन ही खरमास प्रारंभ हो रहा है, जो एक दुर्लभ संयोग है।
फाल्गुन पूर्णिमा और खरमास
खरमास के पहले दिन फाल्गुन पूर्णिमा भी पड़ रही है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। कई लोगों के मन में यह सवाल हो सकता है कि यदि खरमास में शुभ कार्य वर्जित हैं, तो फिर स्नान, दान और पूजा कैसे हो सकते हैं? इसका उत्तर यह है कि खरमास में केवल मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं, लेकिन धार्मिक कार्य जैसे स्नान, दान और पूजा-पाठ करना पूरी तरह से शुभ और आवश्यक माने जाते हैं।
खरमास का समापन कब होगा?
मार्च में शुरू होने वाला खरमास 14 अप्रैल 2025 को समाप्त होगा। इस दिन मेष संक्रांति होगी, जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। पंचांग के अनुसार, सूर्य का यह गोचर तड़के 3:30 बजे होगा। खरमास समाप्त होते ही वैशाख माह की शुरुआत होगी, जिसकी प्रतिपदा तिथि भी इसी दिन रहेगी।
खरमास में क्या न करें?
खरमास के दौरान कुछ कार्य वर्जित माने जाते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है:
- विवाह, सगाई, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
बेटी या बहू की विदाई इस दौरान नहीं की जाती।
- नए कार्यों की शुरुआत वर्जित होती है, जैसे नया व्यवसाय प्रारंभ करना, घर खरीदना या निर्माण कार्य शुरू करना।
- गृह प्रवेश अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान नए घर में प्रवेश करने से बचना चाहिए।
प्याज, लहसुन, मांस, मछली, शराब जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
खरमास का आध्यात्मिक महत्व
- हालांकि खरमास में मांगलिक कार्य नहीं होते, लेकिन यह माह आध्यात्मिक साधना, ध्यान, भजन-कीर्तन और भगवान की आराधना के लिए उत्तम माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति को संयमित जीवनशैली अपनानी चाहिए, दान-पुण्य करना चाहिए और धार्मिक गतिविधियों में संलग्न रहना चाहिए।



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