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Krishnapingal Sankashti Chaturthi: कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी कब है? जानें तिथि, मुहूर्त, चंद्रोदय का समय
Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी व्रत का विशेष महत्व है, हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह दो चतुर्थी तिथियां आती हैं जिसमें कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है। आषाढ़ माह की संकष्टी चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप की विधिवत पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए, जानते हैं कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 04 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर होगा। चूंकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के आधार पर रखा जाता है। ऐसे में, कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय 09 बजकर 53 पर होगा।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 47 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त - सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त - सुबह 08 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग में करें बप्पा की पूजा
इस साल की कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 05 बजकर 28 मिनट से 11 बजकर 46 मिनट तक है। इस शुभ योगमें गणपति बप्पा की पूजा करने से आपको उनकी विशेष कृपा प्राप्त होगी।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही, सभी कार्यों में सफलता मिलती है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और व्यापार करने वाले भी इस दिन गणपति बप्पा की खास पूजा करते हैं।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें
इसके बाद गणेश जी को रोली, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
भगवान को फूल और उनकी प्रिय दूर्वा अर्पित करें।
भगवान गणपति को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।
इसके बाद दीपक जलाकर गणेश जी की आरती करें।
चांद के निकलने से पहले संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें।
रात को चंद्र देव की पूजा करें और उन्हें जल अर्पित करके व्रत पूरा करें।



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