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उत्तराखंड की देवी जिनका क्रोध लाया विनाश! जानें दिन में 3 बार रूप बदलने वाली धारी देवी की अनसुनी कहानी
Dhari Devi Temple Mystery: उत्तराखंड की पावन भूमि न केवल अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की धरती देवी-देवताओं की रहस्यमयी कथाओं और अद्वितीय शक्तियों की भी साक्षी है। यही वजह है कि उत्तराखंड को देव भूमि भी कहा जाता है। वैसे तो वहां की ऐसी बहुत सी हैरान कर देने वाली कहानियां हैं लेकिन आज हम आपको मां धारी देवी के मंदिर का इतिहास बताने जा रहे हैं जिन्हें उत्तराखंड की 'रक्षक देवी' कहा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि साल 2013 में केदारनाथ में आई प्रलय की वजह धारी देवी की सदियों से स्थापित मूर्ति को उनकी जगह से हटाना था। ये हम नहीं बोल रहे बल्कि वहां के स्थानीय लोग इस विकराल हादसे को धारी देवी से जोड़ते हैं। धारी देवी न केवल एक मंदिर में विराजती हैं, बल्कि लोगों की आस्था में जीवंत रूप से बसती हैं। आइए जानते हैं इस शक्ति पीठ का इतिहास और उससे जुड़ी चमत्कारी कथा।

धारी देवी मंदिर का इतिहास
धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) जिले में, अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर एक विशाल शिला (चट्टान) पर बना हुआ है और देवी की मूर्ति को आधे शरीर रूप में स्थापित किया गया है। बता दें कि धारी देवी को उत्तराखंड की कुलदेवी भी माना जाता है और उन्हें चार धामों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देश के कोने-कोने से लोग धारी देवी के दर्शन करने के लिए आते हैं।

धारी देवी की कथा (पौराणिक कहानी)
बहुत समय पहले की बात है, जब अलकनंदा नदी में भयानक बाढ़ आई। बाढ़ के बाद एक चमत्कारी रूप से एक महिला की मूर्ति नदी में बहती हुई आई और एक शिला पर आकर स्थिर हो गई। गांव वालों को यह मूर्ति देवी रूप में प्रतीत हुई, और उन्होंने वहां पूजा शुरू कर दी। रात में एक महिला गांव के मुखिया के सपने में आई और कहा, 'मुझे इस शिला पर ही रहने दो, मैं धारी देवी हूं और इस क्षेत्र की रक्षा करूंगी।' इसके बाद वहां मंदिर की स्थापना हुई और वह स्थान बना धारी देवी मंदिर। अब इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि विदेशों में भी धारी देवी के चमत्कारों के किस्से मशहूर हैं।
मूर्ति हटाई और आई प्रलय जानें 2013 का रहस्य
आप सभी को 16 जून 2013 में केदारनाथ में आई प्रलय के बारे में तो पता ही है कैसे बादल फटा और हजारों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं? दरअसल एक बिजली परियोजना की वजह से धारी देवी की मूर्ति को अस्थायी रूप से हटाया गया। स्थानीय लोगों ने मना किया और कहा कि ऐसा नहीं करें वरना महाविनाश होगा लेकिन किसी ने बात नहीं मानी। फिर क्या था उसी रात उत्तराखंड में भीषण बाढ़ और केदारनाथ आपदा आई, जिसमें हजारों लोग मारे गए।

दिन में 3 बार अलग-अलग रूपों की होती है पूजा
धार गांव में बना धारी देवी का मंदिर अपने चमत्कारों के लिए फेमस है। माना जाता है कि मां धारी देवी धार गांव की रक्षा करती है। इस चमत्कारी मंदिर में मां के ऊपरी देह की पूजा होती है। मां की निचली देह कल्पेश्वर मंदिर (जोशीमठ) में स्थापित हैं और वहां उनकी निचली देह की पूजा की जाती है। धारी देवी की पूजा एक दिन में तीन रूपों में की जाती है। मान्यता के अनुसार, सुबह वो बालिका रूप में पूजी जाती हैं, दोपहर में युवती और रात्रि में वृद्धा के रूप में पूजी जाती हैं। बता दें कि यात्रा से पहले या चारधाम के दौरान धारी देवी के दर्शन करना शुभ माना जाता है।



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