Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 18 April 2026: मिथुन, तुला और कुंभ के लिए आज बड़ा दिन, जानें मेष से मीन तक का हाल -
Akshaya Tritiya 2026 Daan: अक्षय तृतीया पर इन 5 चीजों का करें दान, कभी नहीं होगी अन्न और धन की कमी -
World Hemophilia Day 2026: हीमोफीलिया क्या है? जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज -
Shukra Gochar 2026: अक्षय तृतीया पर शुक्र का गोचर बदलेगा इन 4 राशियों का भाग्य, बाकी के लिए जानें उपाय -
Akshaya Tritiya Wishes In Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों के जरिए अपनो को दें अक्षय तृतीया की बधाई -
गर्मियों में लू और डिहाइड्रेशन से से बचने के लिए पिएं ये 5 समर ड्रिंक्स, चिलचिलाती गर्मी में भी रहेंगे कूल-कूल -
2026 में टूटेगा गर्मी का हर रिकॉर्ड? बाबा वेंगा की ये भविष्यवाणी हुई सच तो फेल हो जाएंगे AC-कूलर -
Heatwave In India: गर्मी और लू से लग गए हैं दस्त? आजमाएं ये 5 देसी नुस्खे जो दिलाएंगे तुरंत आराम -
Benefits of Sattu: लू से लेकर कब्ज तक सत्तू है हर मर्ज का इलाज, जानें गर्मियों में इसे पीने के 5 जबरदस्त फायदे -
वैशाख अमावस्या को क्यों कहते हैं सतुवाई अमावस्या? जानें सत्तू और पितरों का वो रहस्य जो कम लोग जानते हैं
Mahakumbh 2025: महाशिवरात्रि के स्नान को क्यों नहीं माना जाता अमृत स्नान? यह है वजह
mahakumbh 2025 : संगमनगरी प्रयागराज में जारी महाकुंभ 2025 में अब तक तीन अमृत स्नान हो चुके हैं। पहला मकर संक्रांति (14 जनवरी, मंगलवार), दूसरा मौनी अमावस्या (29 जनवरी, बुधवार), और तीसरा बसंत पंचमी (3 फरवरी, सोमवार) को संपन्न हुआ। इन तीनों दिनों श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में संगम स्नान किया।
महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा, लेकिन इस बार केवल तीन स्नान को अमृत स्नान का दर्जा दिया गया है। माघ पूर्णिमा (24 फरवरी) और महाशिवरात्रि (26 फरवरी) के स्नान को अमृत स्नान की मान्यता नहीं दी गई है। इन दिनों श्रद्धालु संगम स्नान तो करेंगे, लेकिन इसे पवित्र स्नान माना जाएगा, अमृत स्नान नहीं। इसके पीछे धार्मिक कारण हैं, जिसमें ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति और शास्त्रीय मान्यताएं शामिल हैं। केवल उन्हीं तिथियों को अमृत स्नान का दर्जा मिलता है, जब ग्रहों की अनुकूल स्थिति और विशेष योग बनते हैं।

माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि को क्यों नहीं माना जाएगा अमृत स्नान?
महाकुंभ में अमृत स्नान की तिथियां ज्योतिष गणना के अनुसार निर्धारित होती हैं। इसके लिए सूर्य का मकर राशि में और गुरु का वृषभ राशि में होना आवश्यक माना जाता है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के दिन यह स्थिति बनी थी, इसलिए उन्हें अमृत स्नान का दर्जा मिला।
हालांकि, माघ पूर्णिमा (24 फरवरी) को सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएगा, जबकि गुरु वृषभ राशि में ही रहेगा। इसी तरह महाशिवरात्रि (26 फरवरी) के दिन भी सूर्य कुंभ राशि में रहेगा, इसलिए इन स्नानों को अमृत स्नान का दर्जा नहीं मिलेगा।
हालांकि, श्रद्धालु इन दिनों संगम स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के स्नान के साथ ही महाकुंभ 2025 का समापन होगा।
माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर स्नान का महत्व
भले ही माघ पूर्णिमा (24 फरवरी) और महाशिवरात्रि (26 फरवरी) को संगम स्नान को अमृत स्नान की मान्यता नहीं मिलेगी, लेकिन इन तिथियों का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। माघ पूर्णिमा पर सौभाग्य और शोभन योग के साथ अश्लेषा और मघा नक्षत्र का संयोग बनेगा, जिससे संगम स्नान करने वालों को अक्षय पुण्य मिलेगा।
महाशिवरात्रि पर शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण होगा। इन दुर्लभ योगों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।



Click it and Unblock the Notifications











