Love Marriage Upay on Mahashivratri: लव मैरिज के इच्छुक जातकों के लिए सुनहरा मौका, जरूर करें ये उपाय

Love Marriage Upay on Mahashivratri: आज भी जब परफेक्ट कपल की बात होती है तब भगवान शिव और माता पार्वती का चित्र कौंध उठता है। सदियां हो गईं लेकिन आज भी शिव-पार्वती के एक-दूसरे के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण दिया जाता है। माता पार्वती ने कड़ी तपस्या करके 108 जन्म लेकर महादेव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। वहीं भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप देवी पार्वती के लिए उनके प्रेम को दर्शाता है।

अगर आप भी इन्हीं की तरह वास्तविक प्रेम प्राप्त करने के इच्छुक हैं तो महाशिवरात्रि के दिन इस उपाय को करें। ताकि आप भी अपने मनपसंद जीवनसाथी से विवाह कर सकें, लेकिन ध्यान रखें कि ये उपाय तभी फलीभूत होते हैं जब इनके प्रति पूरी आस्था और समर्पण हो। महाशिवरात्रि पर किये इन उपायों से महादेव और देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

Mahashivratri 2024 remedies for love marriage jaldi shadi ke upay

महाशिवरात्रि पर प्रेम विवाह के लिए इस विधि से करें पूजा (Love Marriage Ke Upay)

1. महाशिवरात्रि के दिन आप व्रत रखें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनकर शिव मंदिर जाएं। शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए पंचामृत अर्पित करें। फिर पूरे शिव परिवार को जल चढ़ाएं।

2. लाल रंग की मौली लें। लेकिन ध्यान रखें कि मौली इतनी बड़ी हो कि उसे हाथ में लेकर सात बार शिव-पार्वती जी की मौली से परिक्रमा करते हुए उन्हें मौली से बांध दें। मौली को क्लॉकवाइज़ यानि घड़ी की सुई की दिशा अनुसार लपेटना है। इसके बाद देवी पार्वती से अपने विवाह के लिए सच्चे दिल से प्रार्थना करें।

3. महाशिवरात्रि पर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे लाल चूड़ा, लाल चुनरी, लाल वस्त्र, लाल फूल, मेहंदी, रोली, लाल रिबन, लाल रंग की चूडिय़ां आदि अर्पित करें। इसी के साथ माता से प्रार्थना करें कि, "जिस तरह आपको अपना प्रेम, ससम्मान जीवनसाथी के रूप में मिला है, वैसे ही मुझे भी मेरा प्यार पति रूप में मिले।" आपको जरूर इस उपाय से लाभ प्राप्त होगा।

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4. गेंदें की एक बड़ी माला लेकर दोनों को अर्पित करें यानि एक ही माला दोनों को एक साथ पहनायें, अलग-अलग माला ना चढ़ाएं। इसके पश्चात, भगवान शिव को नारियल अर्पित कर 'ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।

5. माता पार्वती के समक्ष रामचरित मानस की इस चौपाई का 21 बार पाठ करें। 'तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहि मोहि रघुबर कै दासी।। जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।' - रामचरित मानस में यह प्रसंग बालकांड का है। जिसके अनुसार प्रभु श्री राम को देखकर सीता जी उनसे विवाह करने की कामना के लिए देवी पार्वती के मंदिर जाकर, इस चौपाई को पढ़ते हुए मां पार्वती से भगवान राम को वर के रूप में प्राप्त करने की कामना की थी और फिर उन्हें पति रूप में पाया भी था।

6. पूजा सम्पन्न होने के बाद महादेव और माँ पार्वती से क्षमा प्रार्थना करें कि इस पूजा में यदि मुझसे कहीं भी कुछ गलती हो गई हो तो मुझे क्षमा करें और मेरी मनोकामना पूरी करें।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Monday, March 4, 2024, 16:12 [IST]
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