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Margashirsha Amavasya Vrat Katha: मार्गशीर्ष अमावस्या पर करें कथा का पाठ, दूर होंगे सारे दुख और बढ़ेगा सुख-सौभा
Margashirsha Amavasya Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या का बहुत महत्व है। इसे अगहन अमावस्या कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान, दीपदान और पितरों का तर्पण करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और पितरों की पूजा करने से जीवन में शांति, धन और सौभाग्य बढ़ता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पूजा करने के बाद इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।

मार्गशीर्ष अमावस्या की व्रत कथा
प्राचीन समय में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। उस परिवार में पति, पत्नी और उनकी एक पुत्री थी। वह कन्या सुंदर, संस्कारवान और गुणवान थी, लेकिन उसकी शादी नहीं हो पा रही थी। एक दिन उसके घर एक साधु महाराज आए। वह लड़की उनका बहुत ख्याल रखती और उनकी सेवा करती थी, जिससे साधु बहुत खुश हुए। साधु ने उसे लंबी आयु का आशीर्वाद दिया, लेकिन कहा कि उसके हाथ में विवाह-योग रेखा नहीं है यानी वैधव्य योग बन रहा है।
यह सुनकर ब्राह्मण दम्पती बहुत दुखी हुए और उन्होंने साधु से पूछा कि इसका उपाय क्या है। साधु ने कहा कि कुछ ही दूरी पर एक गांव में सोना नाम की एक धोबिन है, जो बहुत धार्मिक और पतिव्रता महिला है। यदि वह लड़की उसकी सेवा करे और बदले में वह धोबिन प्रसन्न होकर इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दे और उसके बाद इस कन्या का विवाह हो जाए। साथ ही, इस कन्या की वैधव्य की समस्या दूर हो सकती है। साधु ने यह भी बताया कि वह धोबिन बहुत श्रद्धालु है और हमेशा अपने घर में ही रहती है।
लड़की ने धोबिन की सेवा करना शुरू किया। वो रोज सुबह उसके घर जाकर वहां की सफाई करती, खाना बनाती और अन्य काम करती, फिर वापस अपने घर लौट आती। धोबिन को नहीं पता था कि ये काम कौन करता है। कुछ समय बाद धोबिन ने महसूस किया कि कोई सुबह-सुबह उसके घर काम कर के चला जाता है। उसने अपनी बहू से पूछा कि तुम तो सुबह ही सारे काम कर लेती हो और मुझे पता भी नहीं चलता। बहू ने कहा, "मां जी, मैंने सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे कर रही हैं क्योंकि मैं तो देर से उठती हूं।" यह सब जानकर दोनों सास-बहू अपने घर की निगरानी करने लगी कि आखिर कौन है जो सुबह घर आकर सारा काम करके चला जाता है।
एक दिन उन्होंने लड़की को साफ-सफाई करते पकड़ लिया और पूछा कि वह उनकी चाकरी क्यों करती है? तब लड़की ने पूरी सच्चाई बता दी कि वह साधु के कहने पर धोबिन की सेवा कर रही है ताकि उसकी समस्या दूर हो सके। धोबिन ने उसकी बात सुनी और उसकी मदद करने का निश्चय किया। उस दिन अमावस्या थी। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। फिर सपना धोबिन ने लड़की की मांग में अपना सिंदूर लगाया। जैसे ही उसने ऐसा किया, उसका पति अचानक मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। सोना धोबिन उस दिन अपने घर से यह सोचकर निराजल ही चली गई कि रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा, तो वह उसे भंवरी देकर और परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी।
जब वह पीपल के पेड़ के पास पहुंची, तो उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद ही जल ग्रहण किया। उसकी पूरी भक्ति और तपस्या के कारण उसका पति फिर से जिंदा हो गया। इस तरह, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन धोबिन की भक्ति और सेवा से ब्राह्मण लड़की का वैधव्य योग समाप्त हुआ और उसे सुखी वैवाहिक जीवन मिला।



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