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इस्लाम के एलान के बाद ये थी दुनिया की पहली मस्जिद, जिसे खुद पैगम्बर मोहम्मद साहब ने तामीर किया
इस्लाम धर्म दुनिया में ईसाई धर्म के बाद सबसे ज्यादा प्रेक्टिस करने वाला रिलीजन है। दुनिया के जिन-जिन स्थान पर मुसलमान हैं वहां पर नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदें भी हैं। कुछ तो काफी खूबसूरत और अपने आर्टिटेक्टर के लिए बेमिसाल मानी जाती है। आज दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद काबा शरीफ है जो मक्का में है। जिसके चारों तरफ लाखों मुस्लिम रोज तवाफ करते हैं और उसे अपनी जिंदगी में एक बार जाकर देखने के लिए दुआए मांगते हैं। वैसे आपको बता दें कि इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, बारहवें और आखिरी महीने जु अल-हिज्जा के 8वें दिन से हज की शुरूआत हो जाती है। साल 2023 में हज की शुरुआत 26 जून से हो रही है, जो कि 1 जुलाई तक चलेगी। आगे बढ़ते हुए आपका हम आपको दुनिया की पहली मस्जिद के बारें में बताने जा रहे हैं, जो आप सोंच रहे हैं वो पहली मस्जिद नहीं है..जी हां मक्का में मौजूद काबा इस्लाम आने के बाद पहली मस्जिद नहीं है, बल्कि पहली मस्जिद इस्लामिक के आने के 12 साल बाद बनी थीं।

आइये जानते हैं दुनिया की पहली मस्जिद, मस्जिद-ए-कुबा (Masjid-e-Quba) के बारें में-
पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) की पैदाइश 570 ईस्वी में हुई थी और 40 साल की उम्र में यानि 610 इस्वी में अल्लाह पाक के नबी बने थे। जिससे इस बात का पता चलता है कि इस्लाम की शुरूआत 610 इस्वी में हुई थी।
इस्लाम के आने के बाद 12 साल बाद बनी पहली मस्जिद
बता दें कि पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) के द्वारा इस्लाम के एलान के बाद नमाज को फर्ज करार दे दिया गया था। लेकिन इस्लाम की पहली मस्जिद को बनने में 12 साल का वक्त लग गया था। पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) साहब ने जब मक्का छोड़कर मदीना की हिजरत की थी, और उन्होंने मदीना शहर में रहने का फैसला किया था, उसके बाद ही मुसलमानों की पहली मस्जिद तैयार हुई। इस पहली मस्जिद का नाम मस्जिद-ए-कुबा है।

कैसे हुआ मस्जिद-ए-कुबा (Masjid-e-Quba) का निर्माण
जब पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) मक्का से मदीना हिजरत पर थे तो उस दौरान पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) मदीना से कुछ दूर कुबा नामक स्थान पर ठहरे थे। इस दौरान उन्होंने अपने मानने वालों के साथ इस मस्जिद का निर्माण शुरू किया। कुबा मस्जिद को बनाने में खुद पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) ने काम किया था।
पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) के वक्त में मस्जिद-ए-कुबा के बाद दूसरी मस्जिद जो बनाई गई वो 'मस्जिद ए नबवी' है। ये मस्जिद शहर मदीना में है। लेकिन सबसे अहम बात आपको बता दें कि पहली मस्जिद इस्लाम के उदय होने से हजारों साल पहले बनकर तैयार थी। जिसका निर्माण पैगंबर आदम ने किया था। पैगंबर आदम के बाद इस मस्जिद का निर्माण पैगंबर इब्राहीम और पैगंबर इस्माइल के द्वारा दोबारा से तामीर करवाई गई थी। हदीस में आता है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) ने 14 दिनों तक इस मस्जिद में मदीना में हजरत अली के आने का इंतजार किया। जो मक्का में पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) के बताए कुछ कामों को करने के लिए मक्का में रह गये थे।
मस्जिद-ए-कुबा (Masjid-e-Quba) की खासियतें
कुबा मस्जिद अपने आर्किटेक्टर के लिए फेमस है। इसमें एक साथ करीब 20 हजार लोग नमाज पढ़ सकते हैं। मस्जिद के एक पार्ट में मुस्लिम महिलाएं नमाज पढ़ती है। इस मस्जिद के इंट्रेंस में 7 बड़े और 12 छोटे दरवाजें मौजूद हैं।

मस्जिद की बनावट आज भी वैसी ही
इस मस्जिद के पुराने डिजाइन से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। मस्जिद का गुंबद पहले की तरह आज भी वैसा ही है। कुबा मस्जिद कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि इसमें एक साथ 20 हजार मुसलमान इबादत कर सकते हैं।
कुबा मस्जिद (Masjid-e-Quba) के बारें में हदीज शरीफ है-
मस्जिद क़ुबा की खूबियों के बारें में उन्नीस सही अल-बुखारी हदीसों में है। तेरह साहिब मुस्लिम हदीस, दो सुनन अबू दाऊद हदीस, 6 अल-मुवत्ता हदीस में मौजूद है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब (ﷺ) ने मस्जिद में नमाजें पढ़ी हैं।
Image Courtesy- pinterest.com, Wikipedia



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