Mauni Amavasya 2024: स्वर्ग से साक्षात धरती पर आएंगे पितर, मौनी अमावस्या पर कब और कहां जलाएं दीपक

Mauni Amavasya 2024: हिन्दू धार्मिक संस्कृति में अमावस्या तिथि का बहुत महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार माघी अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस वर्ष की मौनी अमावस्या 9 फरवरी को मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या पर लोग अपने कुल और पितृ देवताओं को खुश करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर अमावस्या को पितृ देवता स्वर्ग से धरती में आते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन पितरों को भी अत्यंत पूजा अर्चना तथा खुश रखने की कोशिश करते हैं क्योंकि कहा जाता है कि हर अमावस्या को पितृ देव स्वर्ग से धरती साक्षात रूप में प्रकट होकर अपने वंश को आशीर्वाद देते हैं। जब पितरों को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो पाती या किसी कारणवश अपने कुल के कर्मों से वे निराश हो जाते हैं, तब परिवार पर पितृ दोष लग जाता है। मौनी अमावस्या के दिन पितरों के नाम से दिया जलाया जाता है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन दीपक कब और कहां जलाएं और क्या है इसका महत्व -

Mauni amavasya 2024 Pitron ke liye diya kaise jalaye: how to lit lamp for ancestors

मौनी अमावस्या के दिन पितरों के लिए दीपक क्यों जलाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पितृ देव स्वर्ग से धरती प्रवास करते हैं। पितृ देवताओं को एक निश्चित समय अनुबंध में अपने लोक में वापस होना पड़ता है। यदि उन्होंने देरी की तो सूर्यास्त होने कारण अंधेरा छा जाता है और वापसी का मार्ग उनके लिए कठिन हो जाता है। इसलिए मान्यता अनुसार पितृ देवताएं सकुशल अपने रास्ते उजाले में जाएँ इस वजह से एक दीप उनके नाम का जलाया जाता है। इससे पितृ देव खुश होकर वापिस लौटते हैं और कुशलता, सुख व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

मौनी अमावस्या पर कब और कहां जलाएं दीपक

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार दीपक जलाना एक धार्मिक क्रिया है। मौनी अमावस्या के दिन, यानी 9 फरवरी को शाम 6 बजे तक सूर्यास्त होगा। ठंड में दिन छोटा होने के कारण अंधेरा जल्दी होने लगता है, इसलिए शाम होते ही दीपक जलाएं। मौनी अमावस्या के दिन आपके पितरो के लिए पीपल वृक्ष के नीचे या अपने घर के दक्षिण में दिशा दीपक जलाएं। इसके साथ ही कुछ दीपक भगवान विष्णु के समक्ष ज़रूर जला दें।

कैसे जलाएं पितरों के नाम का दीपक

मौनी अमावस्या पर आप कुम्हार के पास से सुंदर मिट्टी के दिए ले और इन्हें शुद्ध जल में डुबोकर साफ कर लें। सायं काल में सरसों तेल भर के दीपक में एक रुई के फूल बत्ती लगाए और भगवान विष्णु स्तुति करके अपने पितर देवताओं का स्मरण करते हुए दीपक को जलाएं। और पीपल के परिक्रमा करके अपने पितृ देव को बताएं कि "हे पितृ देव आपको स्वर्ग लोक में सकुशल लौटने के लिए दीपक को प्रज्वलित किया गया है, जिस प्रकार से आपके स्वर्ग लोक के रास्ते में इस दिए से उजाला हुआ है उसी प्रकार हमारे जीवन के अंधेरे को भी प्रकाशमय होने का आशीर्वाद दें।"

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, February 6, 2024, 18:00 [IST]
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