Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
Mohini Ekadashi 2024 Mantra: मोहिनी एकादशी पर होती है श्रीहरि के स्त्री रूप की पूजा, करें इन मंत्रों का जाप
Mohini Ekadashi 2024 Mantra: हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत का पालन करने से जीवन में दुःख और संकटों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
व्रत के पालन और भगवान विष्णु की पूजा की सफलता के लिए इस दिन कुछ ख़ास मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस वर्ष 19 मई को मोहिनी एकादशी मनाई जायेगी। इस मौके पर पेश हैं मोहिनी एकादशी पर जाप करने के लिए श्रीहरि के शक्तिशाली मंत्र:

मोहिनी एकादशी 2024 कब है? (Mohini Ekadashi 2024 Kab Hai?)
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस वर्ष 19 मई दिन सोमवार 2024 को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष को मोहिनी एकादशी है। भगवान श्री हरि विष्णु नारायण ने एकमात्र स्त्री अवतार मोहनी के रूप में लिया था। यह अवतार उन्होंने समुद्र मंथन के पश्चात अमृत कलश की रक्षा करने के लिए लिया था।
मोहिनी एकादशी पर कौन से मंत्र पढ़ें (Mohini Ekadashi Mantra)
1.
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
2.
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।ॐ हूं विष्णवे नम:
3.
देवानाम च ऋषिणाम च गुरुं कांचन सन्निभम।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।।
4.
रत्नाष्टापद वस्त्र राशिममलं दक्षात्किरनतं करादासीनं,
विपणौकरं निदधतं रत्नदिराशौ परम्।
पीतालेपन पुष्प वस्त्र मखिलालंकारं सम्भूषितम्,
विद्यासागर पारगं सुरगुरुं वन्दे सुवर्णप्रभम्।।
5.
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि ।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि ।
6. श्रीहरि विष्णु के पंचरूप मंत्र-
ॐ अं वासुदेवाय नम:।
ॐ आं संकर्षणाय नम:।
ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।
ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।
ॐ नारायणाय नम:।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications