Latest Updates
-
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग
Mohini Ekadashi 2024 Mantra: मोहिनी एकादशी पर होती है श्रीहरि के स्त्री रूप की पूजा, करें इन मंत्रों का जाप
Mohini Ekadashi 2024 Mantra: हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत का पालन करने से जीवन में दुःख और संकटों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
व्रत के पालन और भगवान विष्णु की पूजा की सफलता के लिए इस दिन कुछ ख़ास मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस वर्ष 19 मई को मोहिनी एकादशी मनाई जायेगी। इस मौके पर पेश हैं मोहिनी एकादशी पर जाप करने के लिए श्रीहरि के शक्तिशाली मंत्र:

मोहिनी एकादशी 2024 कब है? (Mohini Ekadashi 2024 Kab Hai?)
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस वर्ष 19 मई दिन सोमवार 2024 को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष को मोहिनी एकादशी है। भगवान श्री हरि विष्णु नारायण ने एकमात्र स्त्री अवतार मोहनी के रूप में लिया था। यह अवतार उन्होंने समुद्र मंथन के पश्चात अमृत कलश की रक्षा करने के लिए लिया था।
मोहिनी एकादशी पर कौन से मंत्र पढ़ें (Mohini Ekadashi Mantra)
1.
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
2.
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।ॐ हूं विष्णवे नम:
3.
देवानाम च ऋषिणाम च गुरुं कांचन सन्निभम।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।।
4.
रत्नाष्टापद वस्त्र राशिममलं दक्षात्किरनतं करादासीनं,
विपणौकरं निदधतं रत्नदिराशौ परम्।
पीतालेपन पुष्प वस्त्र मखिलालंकारं सम्भूषितम्,
विद्यासागर पारगं सुरगुरुं वन्दे सुवर्णप्रभम्।।
5.
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि ।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि ।
6. श्रीहरि विष्णु के पंचरूप मंत्र-
ॐ अं वासुदेवाय नम:।
ॐ आं संकर्षणाय नम:।
ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।
ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।
ॐ नारायणाय नम:।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications