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Narasimha Bhagwan ki Aarti: हर मुराद होगी स्वीकार, पूजा के बाद जरूर करें नरसिंह भगवान की आरती का पाठ
Narasimha Jayanti 2024: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपना नरसिंह अवतार लिया था। अपने इस रूप में भगवान का आधा शरीर सिंह यानी शेर का है और आधा मानव का है। यही वजह है कि भगवान के इस रूप को नरसिंह कहा जाता है। इस अवतार में भगवान ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था।
इस वर्ष 21 मई को नरसिंह जयंती मनाई जायेगी। नरसिंह रूप की पूजा अर्चना करने से जीवन में दुखों व कष्टों से निवारण मिलता है। इस दिन यदि आप भी अपनी मनोकामना पूर्ति की इच्छा रखते हैं तो विशेष आरती का जाप जरूर करें। यहां पढ़ें नरसिंह भगवान की आरती:

श्री नरसिंह भगवान की आरती (Narasimha Bhagwan ki Aarti)
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥
ॐ जय नरसिंह हरे...
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥
ॐ जय नरसिंह हरे...
सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी।
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥
ॐ जय नरसिंह हरे...
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥
ॐ जय नरसिंह हरे...
नरसिंह भगवान की आरती (Narasimha Bhagwan ki Aarti Lyrics)
आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।
वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥
पहली आरती प्रह्लाद उबारे ।
हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥
दुसरी आरती वामन सेवा ।
बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥
तीसरी आरती ब्रह्म पधारे ।
सहसबाहु के भुजा उखारे ॥
चौथी आरती असुर संहारे ।
भक्त विभीषण लंक पधारे ॥
पाँचवीं आरती कंस पछारे ।
गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले ॥
तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा ।
हरषि-निरखि गावे दास कबीरा ॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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