Latest Updates
-
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा
Navratri 2025 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि से लेकर मुहूर्त और आरती तक, जानें सभी जरूरी बातें
Navratri 2025 Day 2 Puja Vidhi: नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह आत्मिक यात्रा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन हमें अलग शिक्षा और शक्ति प्रदान करता है। नवरात्रि का दूसरा दिन (23 सितंबर 2025) मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, धैर्य और भक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। इनकी पूजा से जीवन में शांति, ज्ञान और समृद्धि आती है।

कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
मां ब्रह्मचारिणी को तप और साधना की देवी माना जाता है। ये पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और भगवान शंकर को पाने के लिए इन्होंने कठिन तपस्या की थी। मां का स्वरूप बहुत सरल और शांत है। इनके हाथ में जपमाला और कमंडल रहता है और ये नंगे पांव चलती हुई दिखाई देती हैं। "ब्रह्मचारिणी" नाम का अर्थ है - ब्रह्म (ज्ञान) का आचरण करने वाली। इनकी पूजा से हमें संयम, धैर्य और साधना का महत्व समझ में आता है।
नवरात्रि 2025 दिन 2 की पूजा विधि
सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को फूल, चंदन और अक्षत से सजाएं। मां ब्रह्मचारिणी को गंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। सफेद या हल्के रंग के फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें और धैर्य व तपस्या की शक्ति पाने की प्रार्थना करें।
मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित भोग
मां ब्रह्मचारिणी का स्वभाव तपस्विनी का है, इसलिए इन्हें साधारण और सात्त्विक भोग ही पसंद है।
- दूध और दूध से बनी चीजें जैसे खीर
- फल और गुड़
- मीठे व्यंजन जैसे लड्डू या मालपुआ
- सफेद फूलों के साथ घी का दीपक
- श्रद्धा और प्रेम से भोग अर्पित करने पर मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों के जीवन में शांति और सुख-समृद्धि आती है।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
मंत्र जाप से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में निम्न मंत्रों का उच्चारण करें:
1. ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
2. या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3. दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
इन मंत्रों का सच्चे मन से जाप करने पर साधक को धैर्य, संयम और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से व्यक्ति के जीवन में धैर्य और तपस्या की शक्ति आती है। जब इंसान कठिनाइयों में धैर्य रखता है तो वह हर समस्या को आसानी से पार कर लेता है। मां की कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहती है और साधक को आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मिलता है।
मां ब्रह्मचारिणी आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।



Click it and Unblock the Notifications
