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मां दुर्गा की माटी से बनी इस प्रतिमा का ढाई सौ साल से नहीं हुआ विसर्जन, जानिये रोचक कारण
शक्ति स्वरूपा माता दुर्गा की उपासना के नौ दिन शुरू हो चुके हैं। हर दिन माता के अलग अलग रूपों की पूजा होती है। कहीं पंडाल लगे हैं तो कहीं डांडिया का आयोजन हो रहा है। ऐसे में माता दुर्गा से संबंधित रोचक खबरें भी मिलती रहेंगी।
इन्हीं रोचक खबरों में से एक ख़बर ये है कि माता दुर्गा की मिट्टी से बनी एक प्रतिमा ढाई सौ साल से भी पहले स्थापित की गयी थी जो आज भी जस की तस है और इसकी चमक लोगो को हैरान कर देती हैं। तो आइये आपको इस प्रतिमा के बारे में बताते हैं।

बनारस में है यह मूर्ति
शिव की नगरी काशी विश्व के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। उत्तर प्रदेश स्थित काशी में, जिसे पहले बनारस कहते थे, पुराना दुर्गा बाड़ी नाम की जगह में माता दुर्गा की वो लोकप्रिय मूर्ति है जो आज से ढाई सौ से भी ज्यादा साल पहले स्थापित की गयी थी। समय बीतने का इस प्रतिमा पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा है। हालांकि मूर्ति मिट्टी और पुआल से बनी है फिर भी आज ढाई सौ साल के बाद भी मूर्ति जैसी की तैसी है। यहां ख़ास तौर पर नवरात्रि के समय भक्तों की भारी भीड़ लगती है जो सिर्फ माता की एक झलक पाने के लिए आते हैं।
1767 में हुई थी स्थापना

इस प्रतिमा की स्थापना सन 1767 में की गयी था। इसके बाद से प्रतिमा के पूजन के पश्चात विसर्जन नहीं किया गया। ऐसा कहा जाता है की माता ने खुद ही विसर्जन करने से मना कर दिया था। शिव की नगरी काशी को छोड़ने का मन तो देवताओं का भी नहीं होता।
सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है कि मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए किसी प्रकार का रासायनिक लेप भी नहीं लगाया गया है। फिर भी आज तक मिट्टी का क्षरण नहीं हुआ है। इस अद्भुत शिल्पकारी को देखने लोग दूर दूर से आ रहे हैं।
बंगाली परिवार ने की थी इस मूर्ति की स्थापना
यह मूर्ति मुखर्जी परिवार द्वारा स्थापित की गयी थी। जब विसर्जन के लिए प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया गया तो यह अपनी जगहस से हिली ही नहीं। इसके बाद कुछ और लोगों की मदद ली गयी मगर मां अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। तब मुखर्जी परिवार के मुखिया के सपने में देवी मां ने खुद दर्शन देकर कहा कि वह उनके सेवाभाव से बहुत प्रसन्न हैं और यहीं रहना चाहती हैं। तब से लेकर आज तक मां इसी बंगाली परिवार के घर में विराजमान है। हर साल पूजा के समय मां दुर्गा के दर्शन के लिए दूर दूर से लोग यहां आते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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